मन्नू शर्मा पराशर समाज जागरण चीफ ब्यूरो प्रमुख
जैतो, 18 सितंबर (रघुनंदन पराशर);साल 2025 का आखिरी सूर्य ग्रहण 21 सितंबर (रविवार) को भारत में नहीं दिखाए देगा। भारत में न ही इस ग्रहण का कोई प्रभाव पड़ेगा। ना ही इस ग्रहण का सूतक आदि कुछ भी हमारे देश में लगेगा।
यह जानकारी सनातन धर्म प्रचारक प्रसिद्ध विद्वान ब्रह्मऋषि पं. पूरन चंद्र जोशी ने दी। उन्होंने कहा कि साल 2025 जैसे-जैसे अपने आखिरी चरण की तरफ बढ़ रहा है, अंतरिक्ष में दिलचस्पी रखने वालों का रोमांच चर्म पर पहुंचता जा रहा है। जल्द ही साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। हालांकि, इस खगोलीय घटना को हर जगह से नहीं देखा जा सकेगा, लेकिन इसके बावजूद सूर्यग्रहण को लेकर लोगों उत्सुकता बनी हुई है। यह एक आंशिक सूर्यग्रहण होगा जिसका मतलब है कि चंद्रमा सूर्य की डिस्क का केवल एक हिस्सा ही ढक पाएगा। ग्रहण की छाया जिस क्षेत्र से होकर गुजरेगी, वहां पर दिलचस्प नजारा दिखाई देगा। भारतीय समयानुसार रात लगभग 11.00 बजे यह ग्रहण शुरू होगा और 22 सितंबर की सुबह तक जारी रहेगा। यह सुबह लगभग 3.24 बजे समाप्त होगा। आंशिक ग्रहण न्यूजीलैंड और अंटार्कटिका के एक बड़े दूरस्थ भाग के बीच दक्षिणी प्रशांत महासागर से दिखाई देगा। जबकि अंटार्कटिका प्रायद्वीप में सूर्यास्त से कुछ समय पहले केवल आंशिक ग्रहण दिखाई देगा। दक्षिण अटलांटिक के किनारे के कुछ स्थानों पर भी इसकी झलक देखने को मिल सकती है। जब ग्रहण होगा उस दौरान भारत में रात का समय होगा, ऐसे में इसे भारतीय प्रायद्वीप में रहने वाले लोग नहीं देख सकेंगे। यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका के देश भी समय के अंतर के कारण इसे नहीं देख सकेंगे। ग्रहण के दौरान सूर्य का 86% हिस्सा चंद्रमा की छाया के पीछे छिप जाएगा। न्यूजीलैंड के दक्षिणी द्वीप के दक्षिणी भाग में ग्रहण सबसे गहरा दिखाई देगा। साल का आखिरी सूर्यग्रहण चंद्रग्रहण के बाद हो रहा है। दो बड़ी खगोलीय घटनाओं के साथ यह खगोलविदों के लिए सितम्बर का महीना खास होने जा रहा है। सूर्यग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच सीधी रेखा में आ जाता है। इस अवस्था के चलते सूर्य का कुछ या पूरा प्रकाश अवरुद्ध हो जाता है। इस ग्रहण का कोई भी प्रभाव भारत में किसी भी राशि आदि पर विल्कूल भी नहीं पड़ेगा। ना ही ग्रहण का सूतक मान्य होगा।



