नौडीहा बाजार से 15 किमी की दूर अपना भवन नहीं होने से छात्राओं को होती है भारी परेशानी
समाज जागरण सत्येंद्र चौरसिया
पलामू (झारखंड)पलामू ज़िले के छतरपुर में शिक्षण व्यस्था का अजब हाल है, 10 सालों से राज्य सरकार द्वारा संचालित झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय छतरपुर के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में मर्ज कर चलाया जा रहा है। नतीजन ग्रामीण इलाके की दूरस्थ गांवों की छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अपना भवन नहीं होने से छात्राएं किसी तरह कस्तूरबा विद्यालय में पढ़ने को विवश हैं, जहां पहले से ही सकैडो छात्राएं अध्ययनरत हैं। मिली विभागीय जानकारी के अनुसार झारखंड आवासीय बालिका विद्यालय में 350 बच्चों को हर साल साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा जाता है।

अपने स्थापना काल से ही यह विद्यालय छतरपुर के कस्तूरबा विद्यालय में रामभरोसे चल रहा है, जबकि विद्यालय चलाने हेतु प्रतिवर्ष करोड़ों का आवंटन उस विद्यालय को प्राप्त होता है। विभागीय जानकारी के अनुसार झारखंड आवासीय बालिका विद्यालय में नियमानुसार नौ शिक्षक, एक लेखापाल, तीन कुक, दो गार्ड और तीन स्वीपर की आवश्यकता है, साथ ही उसे अपने भवन की भी दरकार है दुर्भाग्य ये है कि आज एक दशक के बाद भी इस विद्यालय को अपना भवन नसीब नहीं हुआ है। वहीं कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय छतरपुर की बात करें तो इस विद्यालय में 525 बच्चों का स्टेन्थ हैं, जहां फिलहाल लगभग 480 छात्राओं का नामांकन दर्शाया गया है और वे वहां अध्ययनरत हैं। अगर यहां यूनिट के हिसाब से सृजित पदों की बात करें तो यहां फुलटाइमर शिक्षक पांच, पार्टटाइमर ग्यारह, रसोइया तीन, गार्ड एक और स्वीपर मात्र एक है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां दूरस्थ ग्रामीण इलाकों से आई छात्राएं कैसे शिक्षा ग्रहण करती होंगी और उन्हें किस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता ह्योग।
इस मामले पर बात करते हुयर सामाजिक कार्यकर्ता अरविन्द गुप्ता चुनमून ने कहा कि प्राथमिकता के आधार पर विद्यालय को अलग कर देना चाहिए, इलाकि गरीब है गरीब घरों की छात्राओं को ज्यादा परेशानी होती है, नौडीहा बाज़ार में विद्यालय बन जाने से छात्राओं को आसानी होती। उन्होंने मुख्यमंत्री, वित्तमंत्री और पलामू डीसी से मांग किया है कि वे इस मसलव कि गम्भीरता समझते हुए विद्यालय के भवन के निर्माण करवाएं। बरहाल वहीं लोग बताते हैं कि अगर नौडीहा बाजार के लिए सन्चालित झारखंड आवासीय बालिका विद्यालय को अलग कर उसे नौडीहा बाजार स्थित दूसरे भवन में संचालित कर देने से छात्राओं को भारी परेशानी से बचाया जा सकता है। हालांकि कई दफा इसकी जानकारी पलामू डीसी और सबंधित विभाग के आलाधिकारियों को भी दी जा चुकी है लेकिन इस समस्या के समाधान के दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है।




