आंगनवाड़ी कर्मियों की गरिमा व सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत

POSH Act अनुपालन एवं प्रशासनिक पारदर्शिता पर उठे सवाल

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
राष्ट्रीय आरटीआई कार्यकर्ता सह मानवाधिकार कार्यकर्ता मोहम्मद अनसार खाँ द्वारा राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू), नई दिल्ली के समक्ष एक महत्वपूर्ण शिकायत प्रस्तुत की गई है। शिकायत में आंगनवाड़ी सेविका एवं सहायिका की गरिमा, मानसिक सुरक्षा तथा कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण से जुड़े गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं।


शिकायत के अनुसार, फरवरी 2026 के दौरान प्रकाशित विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में पोठिया प्रखंड से संबंधित प्रशासनिक घटनाक्रम एवं आरोपों ने महिला कर्मियों की कार्यस्थल सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न खड़े किए। साथ ही, जिला एवं प्रमंडलीय स्तर के आदेशों के बीच कथित प्रशासनिक असंगति से स्थिति में अनिश्चितता उत्पन्न होने का भी उल्लेख किया गया है।


POSH Act अनुपालन पर स्पष्टता की मांग
शिकायत में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (POSH Act) के प्रावधानों के अनुपालन को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। विशेष रूप से निम्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है—
आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन
अधिनियम के तहत जांच प्रक्रिया
जांच निष्कर्ष एवं कार्रवाई रिपोर्ट
पीड़ित महिला कर्मियों के लिए संरक्षण उपाय
शिकायतकर्ता ने आयोग से अनुरोध किया है कि यदि संबंधित मामले में कोई शिकायत दर्ज हुई है, तो उसकी निष्पक्ष एवं विधिसम्मत जांच सुनिश्चित की जाए।


महिला कर्मियों पर संभावित प्रभाव
शिकायत में यह भी रेखांकित किया गया है कि प्रशासनिक अनिश्चितता, विरोधाभासी आदेश एवं जांच प्रक्रिया में अस्पष्टता से महिला कर्मियों के बीच भय, मानसिक तनाव और असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो सकती है, जिससे कार्यस्थल का वातावरण प्रभावित होने की आशंका है।
आयोग से हस्तक्षेप की मांग
मोहम्मद अनसार खाँ ने राष्ट्रीय महिला आयोग से संबंधित विभाग/प्रशासन से Action Taken Report (ATR) प्राप्त करने, POSH Act अनुपालन की समीक्षा करने तथा आंगनवाड़ी सेविका/सहायिका की गरिमा एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक सुधारात्मक निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।


साथ ही, POSH अनुपालन एवं ICC कार्यवाही से संबंधित जानकारी के लिए दायर आरटीआई आवेदनों के उत्तरों में कथित अस्पष्टता का मुद्दा भी उठाया गया है, जिससे संस्थागत पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि यह मामला महिला कर्मियों की गरिमा, मानसिक सुरक्षा एवं कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण जैसे संवेदनशील विषयों से जुड़ा है। राष्ट्रीय महिला आयोग के समक्ष शिकायत प्रस्तुत होने के बाद अब संबंधित प्रशासनिक एवं वैधानिक प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित होने की संभावना है।

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