पूर्व सैनिक की बेटी ने किया गाँव का नाम रौशन,असिस्टेंट रजिस्ट्रार पद पर हुई चयनित

अभय कुमार मिश्रा,दैनिक समाज जागरण, ब्यूरो चीफ,कोल्हान झारखंड

जमशेदपुर (झारखंड) 2 दिसंबर 2025: रोहतास जिला के छोटे से गाँव बुधुआँ (अकोढी गोला) की बेटी ने रचा इतिहास—ए बी वी आई आई आई टी एम ग्वालियर की एकमात्र असिस्टेंट रजिस्ट्रार पद पर निहारिका का चयन
एक छोटे कस्बे के साधारण परिवार से पली-बढ़ी निहारिका ने संघर्ष, मेहनत और निरंतर प्रयास के दम पर वह उपलब्धि हासिल की है, जो कई युवाओं का सपना होती है। उनका चयन देश के प्रतिष्ठित अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान, ग्वालियर (ए बी वी आई आई आई टी एम ग्वालियर) में असिस्टेंट रजिस्ट्रार (लीगल) पद पर हुआ है। उल्लेखनीय है कि इस पद के लिए पूरे भारत में केवल एक ही रिक्ति थी। निहारिका की शिक्षा यात्रा हमेशा उत्कृष्ट रही है। उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (आर एम एल एन एल यू), लखनऊ से बी ए एल एल बी(Hons.) वर्ष 2020 में पूरा किया। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ते हुए वर्ष 2021 में देश के प्रतिष्ठित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टी ई ई एस), मुंबई से एल एल एम की डिग्री प्राप्त की। उच्च शिक्षा के बाद निहारिका को राष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी शैक्षणिक प्रतिभा के लिए सम्मान मिला। उन्हें मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार (एम एच आर डी, गोल) की ओर से मेरिट सर्टिफिकेट प्रदान किया गया। साथ ही, निहारिका गोल्ड मेडलिस्ट भी हैं, जो उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों का प्रमाण है। फरवरी 2022 से निहारिका दिल्ली स्किल एंड एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी (डी एस ए यू), दिल्ली गवर्नमेंट यूनिवर्सिटी में ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिसर (ग्रेड ए) के रूप में कार्यरत हैं। इस भूमिका में उन्होंने विद्यार्थियों के लिए इंडस्ट्री कनेक्ट, प्लेसमेंट के अवसर, प्री-प्लेसमेंट ट्रेनिंग और कौशल विकास कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्रशासनिक जिम्मेदारियों और चुनौतियों के बावजूद निहारिका ने अपनी तैयारी और लक्ष्य को कभी नहीं छोड़ा। उनकी मेहनत ने अंततः उन्हें राष्ट्रीय महत्व के संस्थान ए बी वी में असिस्टेंट रजिस्ट्रार (लीगल) के सम्मानित पद तक पहुँचाया। निहारिका का कहना है,“मेरी यह यात्रा आसान नहीं थी, लेकिन मैंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। मैं चाहती हूँ कि छोटे शहरों और सीमित संसाधनों से आने वाली लड़कियाँ जानें कि मेहनत और लगातार प्रयास से कोई भी मंज़िल पाई जा सकती है। उनकी उपलब्धि न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे बुधुआँ, गाँव एवम क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। निहारिका की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों में भी बड़े सपने देखते हैं। निहारिका बुधुआँ गाँव के स्वर्गीये पंडित श्री रामस्वरूप पांडे जी की परपोती , स्वर्गीये श्री बबन पांडे उर्फ जनता बाबा की पोती है! इनकी इस उपलब्धि पर उनके दादा श्री ददन पांडे बहुत खुश है!इनके पिता भारतीय थल सेना के पूर्व सूबेदार (कारगिल युद्ध विजेता) बी के पान्डे (निराला जी) इसे अपने गाँव के लिये सम्मान की बात मानते हैं! निहारिका का कहना है कि वे अपने गाँव के सभी लड़कियों को निशुल्क भाव से उनके उज्जवल भविष्य के लिये सहयोग करती रहेंगी ताकि गाँव की और भी लड़कियों को सरकारी या गैर सरकारी विभाग मे अपनी सेवा प्रदान करने का अवसर मिलता रहे,निहारिका के छोटे भाई ने भी सेना मे अधिकारी बन कर पहले ही अपने गाँव का नाम रौशन किया है ! पद पर चयन के बाद गाँव के बधाई देने मे प्रमुख पंडित, ददन पान्डे,आशुतोष तिवारी उर्फ छोटन बाबा,राम अवध राम, संजय सिंह यादव, लोकगायक देवलाल जी, अवधेश साह,अजीत कुमार महतो, एवम समस्त बुधुआँ ग्रामवासी शामिल रहे।

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