दिल्ली: डीटीसी बसों मे जेब कतरों का कब्जा, झपटमारों का आतंक

दिल्ली/नोएडा समाज जागरण

दिल्ली के बसों मे आजकल जहाँ एक तरफ जेब कतरों का कब्जा है वही झपटमारों ने भी आतंक मचा रखा है। बताया जाता है कि जेब कतरो एवं झपटमारों के लिए आजकल दिल्ली के सड़को से ज्यादा सुरक्षित है दिल्ली के डीटीसी बस। यही कारण है कि जेब कतरे एवं झपटमारों ने अब दिल्ली के सड़क के बजाय दिल्ली के सरकार बसों को अपना अड्डा बना लिया है।

सोशल मिडिया (एक्स) @delhibuses1 पर तेजी से एक विडियों वायरल हो रहा है जिसमे साफ-साफ देखा जा सकता है कि झपटमार एक महिला जो कि बस के सीट पर बैठी मोबाइल चला रही है झपटमार उसकी मोबाइल झपटकर नौ दो ग्यारह हो जाता है और लोग मुकदर्शक बने रहते है। लोगों का कहना है कि जो लोग बोलेगा या पकड़ेगा उसी पर यह लोग ब्लैड से हमला कर देते है। यही कारण है कि आम लोग तो क्या बस के ड्राइवर और कंडक्टर भी सुरक्षित नही है और अनदेखी करते रहते है क्योंकि उनको इसी रूट मे चलना है।

यात्रियों का कहना है कि जब बस मे मार्शल चलता था तो थोडा ठीक भी था लेकिन जब से दिल्ली सरकार ने मार्शल को हटा लिया है बहुत ही बुरा हाल हो गया है। सरकार को यात्रियों के सुरक्षा के मध्यनजर जल्दी से जल्दी मार्शल को बहाल करना चाहिए। एक यात्री ने कहा है कि मार्शल अगर बस मे न होके बस स्टैण्ड पर भी खड़ा रहे तो भी जेब कतरी झपटमारी कम होगा।

एक यात्री ने लिखा है कि दिल्ली के लोग फ्री फ्री के खाने के चक्कर मे लगे रहते है। फ्री के बिजली फ्री के पानी, फ्रि के राशन, फ्रि बस मे यात्रा। दिल्ली वालों को सबकुछ फ्रि मे चाहिए तो मार्शल कहाँ से चलेंगे उनका वेतन कौन देगा ? डीटीसी के बस ड्राइवर और कंडक्टर भी परेशान रहते है। फ्रि के चक्कर मे बस की मैंटेनेंस नही हो पा रहा है। जब सब कुछ फ्री मे चाहिए तो सुरक्षा कौन करेगा।

हालात यह है कि आम आदमी बस मे सफर करने से पहले चार बार सोचता है कि इसमे यात्रा करे या नही। देश के राजधानी दिल्ली मे सरकारी बसों की हालात क्या फ्रि फ्रि का नतीजा है या फिर दिल्ली सरकार की असफलता। आखिर दिल्ली के डीटीसी बसों मे यात्रा करने वाले पुरुष या महिलाओं की सुरक्षा किसका जिम्मेदारी है। क्या इस हालात के लिए दिल्ली पुलिस और केन्द सरकार जिम्मेदार या दिल्ली सरकार। गरीबी, बेरोजगारी हटाने की बात करने वाली सरकारे, आम आदमी के हितैषी आखिर इन बस यात्रियों के सुरक्षा मे लापरवाही क्यो बरत रहे है क्या यहाँ भी वोट बैंक है। आखिर जेब कतरों के वोट किसे मिलेंगे और इनके वोट से किसकी सरकार बनती है।

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