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आरटीआई में सूचना देने से इनकार, पत्रकार ने डीएम से की कार्रवाई की मांग

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने को लेकर एक आरटीआई कार्यकर्ता सह पत्रकार ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। रुईधाशा वार्ड संख्या-24 निवासी पत्रकार धर्मेन्द्र सिंह ने भवन प्रमंडल किशनगंज पर सूचना छिपाने और भ्रामक जवाब देने का गंभीर आरोप लगाया है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार धर्मेन्द्र सिंह ने 02 जनवरी 2026 को लोक सूचना पदाधिकारी, भवन प्रमंडल किशनगंज को आरटीआई आवेदन देकर निरीक्षण भवन (आईबी) के निर्माण पूर्ण होने के बाद से अब तक उसके रख-रखाव के लिए निकाली गई सभी निविदाओं से संबंधित जानकारी मांगी थी। आवेदन में निकाली गई निविदाओं की संख्या, निविदाकारों के नाम-पते, स्वीकृत राशि, किसके पक्ष में निविदा स्वीकृत हुई, संबंधित ठेकेदार का नाम तथा निविदा में जमा दस्तावेजों की अभिप्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। इसके साथ 10 रुपये का भारतीय पोस्टल ऑर्डर भी संलग्न किया गया था।


आरोप है कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। बाद में भवन प्रमंडल किशनगंज के कार्यपालक अभियंता पंकज कुमार सिंह ने कार्यालय पत्रांक-137, दिनांक 29 जनवरी 2026 के माध्यम से सूचना देने से इनकार करते हुए सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4(1)(घ) एवं 8(1)(घ) का हवाला दिया और मांगी गई सूचना को अस्पष्ट तथा प्रकटीकरण योग्य नहीं बताया।


आरटीआई कार्यकर्ता धर्मेन्द्र सिंह का कहना है कि मांगी गई सूचना किसी व्यक्ति की गोपनीयता या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी नहीं है, बल्कि सरकारी धन के उपयोग और प्रशासनिक पारदर्शिता से संबंधित है। ऐसे में सूचना देने से इनकार करना आरटीआई अधिनियम की भावना के विपरीत है और इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।


सूचना नहीं मिलने पर उन्होंने 06 फरवरी 2026 को प्रथम अपील दायर करते हुए जिलाधिकारी सह प्रथम अपीलीय प्राधिकार, किशनगंज से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। साथ ही लोक सूचना पदाधिकारी को सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश देने और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है। प्रथम अपील के साथ भी 10 रुपये का भारतीय पोस्टल ऑर्डर संलग्न किया गया है।


आवेदक ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर शीघ्र सूचना उपलब्ध कराने तथा लापरवाही बरतने वाले पदाधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।


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