समाज जागरण अनिल कुमार
हरहुआ वाराणसी।
घने कोहरे में सरकारी बसें लेट हो सकती हैं, ट्रेन लेट हो सकती हैं निरस्त भी हो जाती हैं , फ्लाइट बिलम्ब छोड़िए कैंसिल हो जाती है ।
अधिकारी और कर्मचारी ऑफिस देर से पहुँच सकते हैं, बैंक का कार्य देर से प्रारंभ हो सकता हैं , विधानसभा ,लोकसभा सत्र में विधायक , सांसद देर से पहुंच सकते हैं सत्र देर से प्रारंभ किया जा सकता हैं । प्रधानमंत्री जी की विदेश यात्रा टल सकती है मगर एक शिक्षक से समाज व शासन प्रशासन की उम्मीद यही रहती है कि वह समय से विद्यालय पहुँचें।
चाहे आँधी , तूफान , घना कोहरा या कुछ भी हो ऐसे में शिक्षक घर से चाहे जितनी जल्दी विद्यालय के लिए निकले किंतु (घने कोहरे के कारण अनहोनी की आशंका के चलते जहां एक ओर सभी की गति थम सी जाती हैं वही दूसरी ओर) शिक्षक धीरे धीरे सावधानी से (कछुए की चाल से ही सही) मगर विद्यालय समय से पहुँचने की जद्दोज़हद में लगा रहता है। तब भी कुछ बिलम्ब हुआ तो गांव में आग से हाथ सेकते लोग देरी का कारण या समय पूछ सकते हैं । घर से निकलने के बाद शिक्षक भयग्रस्त रहता है कि रास्ते मे अभिभावक टोक न दें , उच्चाधिकारी निरीक्षण में न आ जाएं । ऐसे में हर वर्ष कई शिक्षक कोहरे की भेंट चढ़ जाते हैं। शिक्षक साथियों से कहना है कि ज़िन्दगी है तो नौकरी है। थोड़ा धीरे चले मगर सुरक्षित पहुंचे।
आपके साथ आपका परिवार जुड़ा है । आपके लिए पूरा संसार है मगर आपके परिवार के लिए आप ही पूरा संसार हैं । सुरक्षित रहकर सरकारी सेवाओं को करते हुए अपना ध्यान रखें।
बच्चे देश के भविष्य हैं उनके प्रति हमारी जिम्मेदारी ,प्यार ,स्नेह हर बिंदुओं से उन्हें सवारने का कार्य करते रहना है। शीतकालीन छुट्टियां हो तो गई पर कार्यालय,स्कूल जाने की जिम्मेदारी वफादारी से करें।
उक्त बातें उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला महामंत्री और राज्य शिक्षक सम्मान प्राप्त सम्मानित डॉ0 शैलेन्द्र विक्रम सिंह ने एक भेंटवार्ता में कहते हुए बच्चों के शिल्पकार महिला-पुरुष शिक्षकों को अमूल्य जीवन को सुरक्षित रहने की सलाह दी।
जान हैं तो जहान हैं वरना सब विरान है।
समायोजन काउंसिलिंग प्रक्रिया के विरोध में शिक्षकों का बीएसए कार्यालय पर प्रदर्शन को समसामयिक और उचित बताया।
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