देशभर में सुहागिन महिलाएं निर्जला उपवास कर मनाई हरतालिका तीज का पर्व*

अभय कुमार मिश्रा, दैनिक समाज जागरण, ब्यूरो चीफ, कोल्हान झारखंड

सरायकेला खरसावां (झारखंड) 26 अगस्त 2025: आज देशभर में हरतालिका तीज का पर्व मनाया जा रहा है। इसे तीजा के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्य की थी, जिससे प्रसन्न होकर महादेव ने पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया। तभी से यह व्रत विशेष महत्व रखता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और पति की लंभी आयु की कामना करते हुए शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।

*हरतालिका तीज व्रत कथा*



हरतालिका तीज हिंदू धर्म का प्रमुख व्रत है, जिसके प्रभाव से महिलाओं को पति की लंबी उम्र और उनका जन्मों-जन्मों के साथ का आशीर्वाद मिलता है। इस व्रत को देवी-पार्वती और उनकी तपस्या से जोड़ा जाता है। पौराणिक कथा की मानें तो देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। कहते हैं कि माता पार्वती ने अपनी कठोर तपस्या बाल्यावस्था में हिमालय पर्वत पर गंगा तट की थी। इस दौरान वह केवल सूखे पत्तों का सेवन किया करती थी और इसी में अपनी तप में लीन रहती थीं। फिर एक समय की बात है जब देवर्षि नारद भगवान विष्णु के विवाह प्रस्ताव लेकर देवी पार्वती के पिता के पास पहुचे। यहां आकर देवऋषि नारद जी ने भगवान विष्णु के विवाह प्रस्ताव की बात की। इस दौरान यह बात देवी पार्वती  को पता चली और वह इसकी चर्चा अपनी सखी से की। इसके बाद सखी ने उन्हें वन में जाने की सलाह दी। इसके बाद देवी वन में आ गई और उन्होंने रेत से शिवलिंग बनाकर भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को भगवान शिव की आराधना की।माना जाता है कि देवी की भक्ति से प्रसन्न महादेव  प्रकट हुए और पार्वती जी को पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया। तभी से ऐसी मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया पर हरतालिका तीज का व्रत रखने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही सभी इच्छाएं भी पूरी होती हैं।

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