धर्म परिवर्तन विरोधी कानून को समाप्त करने का प्रयास हिंदू आस्था पर आघात

विहिप अध्यक्ष आलोक गर्ग बोले — “यह कानून सनातन संस्कृति की रक्षा का कवच है, सुप्रीम कोर्ट में इसका मजबूती से पक्ष रखा जाए”*

रिपोर्ट: रविंद्र आर्य

ग़ाज़ियाबाद:
विश्व हिंदू परिषद (विहिप), संत समाज एवं हिंदू संगठन परिवार के कार्यकर्ताओं ने आज विहिप अध्यक्ष आलोक गर्ग के नेतृत्व में ज़िला कलक्ट्रेट, ग़ाज़ियाबाद में एक विशाल प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन का उद्देश्य उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए धर्म परिवर्तन विरोधी कानून को सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती का विरोध दर्ज कराना था।

संगठनों ने स्पष्ट कहा कि यह कानून सनातन धर्म और हिंदू समाज की सुरक्षा का कवच है, जिसे समाप्त करने का कोई भी प्रयास हिंदू आस्था पर आघात होगा।



विहिप अध्यक्ष आलोक गर्ग ने कहा—
“यह कानून न केवल अवैध धर्मांतरण गतिविधियों पर रोक लगाता है, बल्कि महिलाओं, युवतियों और समाज की सांस्कृतिक सुरक्षा के लिए आवश्यक है। हम मांग करते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में इस कानून का मजबूती से पक्ष रखा जाए और इसे पूर्ण रूप से लागू रखा जाए।”

*संत समाज और सर्व समाज का समर्थन*

आज ग़ाज़ियाबाद में “सर्व समाज” बैनर के अंतर्गत नगर के विभिन्न हिंदू संगठनों ने धर्म-स्वातंत्र्य विधेयक के समर्थन में यात्रा निकाली।
धर्माचार्य पंडित अशोक कृष्णा महाराज (राष्ट्रीय अध्यक्ष – सर्व सेवा परिषद) ने कहा—

“इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का भीषण षड्यंत्र देश के भीतर चल रहा है। इसका उद्देश्य हिंदू समाज का धर्मांतरण कर भारत की सांस्कृतिक धरोहर पर कुठाराघात करना है। हम इस कानून का पुरजोर समर्थन करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि—
“धर्म स्वतंत्रता कानून किसी धर्म के विरोध में नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक अखंडता और आध्यात्मिक संतुलन की रक्षा के लिए लाया गया है। संविधान का अनुच्छेद 25 केवल धर्म बदलने की नहीं, अपने धर्म में सुरक्षित रहने की स्वतंत्रता भी देता है। छल, बल या प्रलोभन से कराया गया धर्मांतरण व्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन और समाज की अस्मिता पर आघात है।”

*डासना मंदिर से छोटे यति नरसिंहानंद गिरी का आवाहन*

यति नरसिंहानंद गिरी जी ने कहा—
“समाज इस षड्यंत्र को पहचाने और धर्म-स्वातंत्र्य कानूनों का पुरजोर समर्थन करे। ये कानून केवल हिन्दू समाज ही नहीं, बल्कि भारतीयता के रक्षक हैं।”

*प्रमुख उपस्थितजन*
विहिप अध्यक्ष आलोक गर्ग,
सुभाष बजरंगी, संजय बरनवाल, सत्येंद्र ठाकुर, अजय, सुनील कुमार सहित अनेक संत, धर्माचार्य और संगठन प्रमुख उपस्थित रहे।

*मीडिया संवाद*
न्यूज़ 31 इंडिया के वरिष्ठ संवाददाता रजत शर्मा ने आंदोलन के दौरान संत समाज एवं हिंदू संगठनों के नेताओं से महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे —

*क्या यह आंदोलन केवल कानून समर्थन तक सीमित रहेगा या दीर्घकालिक सामाजिक अभियान के रूप में जारी रहेगा?*

(विहिप अध्यक्ष आलोक गर्ग): “यह केवल प्रदर्शन नहीं, यह समाजिक चेतना का अभियान है। जब तक धर्मांतरण की साजिशें समाप्त नहीं होतीं, यह आंदोलन जारी रहेगा।”

*सुप्रीम कोर्ट में इस कानून के पक्ष में हिन्दू संगठनों की संयुक्त पहल क्या होगी?*

(संत समाज प्रतिनिधि): “हम संगठित होकर सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका (intervention application) दायर करेंगे और कानूनी पक्ष को मजबूत बनाएंगे।”

*क्या इस आंदोलन को अखिल भारतीय स्तर पर ले जाने की योजना है?*

(पंडित अशोक कृष्ण जी महाराज): “हाँ, यह अब राष्ट्रीय स्वरूप लेगा। देश के हर जिले में ‘धर्म सुरक्षा यात्रा’ निकाली जाएगी।”

*धर्मांतरण रोकने में प्रशासनिक तंत्र से क्या अपेक्षाएँ हैं?*

(सुभाष बजरंगी): “प्रशासन को जमीनी स्तर पर सक्रिय रहना चाहिए। फर्जी एनजीओ और मिशनरियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।”

क्या इस कानून को “भारतीय संस्कृति की सुरक्षा” के रूप में जनता के बीच प्रचारित किया जाएगा?

(छोटे यति नरसिंहानंद गिरी): “हाँ, समाज को यह समझाया जाएगा कि धर्म-स्वातंत्र्य कानून केवल हिन्दू समाज का नहीं बल्कि पूरे भारत की आत्मा की रक्षा का माध्यम है।”

प्रेषक:
विश्व हिंदू परिषद (विहिप), ग़ाज़ियाबाद इकाई
रिपोर्ट: रविंद्र आर्यप्रेस विज्ञप्ति

*“धर्म परिवर्तन विरोधी कानून को समाप्त करने का प्रयास हिंदू आस्था पर आघात — ग़ाज़ियाबाद में विहिप और संत समाज हिन्दू संगठनों का विशाल प्रदर्शन”*

*विहिप अध्यक्ष आलोक गर्ग बोले — “यह कानून सनातन संस्कृति की रक्षा का कवच है, सुप्रीम कोर्ट में इसका मजबूती से पक्ष रखा जाए”*

रिपोर्ट: रविंद्र आर्य

ग़ाज़ियाबाद:
विश्व हिंदू परिषद (विहिप), संत समाज एवं हिंदू संगठन परिवार के कार्यकर्ताओं ने आज विहिप अध्यक्ष आलोक गर्ग के नेतृत्व में ज़िला कलक्ट्रेट, ग़ाज़ियाबाद में एक विशाल प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन का उद्देश्य उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए धर्म परिवर्तन विरोधी कानून को सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती का विरोध दर्ज कराना था।

संगठनों ने स्पष्ट कहा कि यह कानून सनातन धर्म और हिंदू समाज की सुरक्षा का कवच है, जिसे समाप्त करने का कोई भी प्रयास हिंदू आस्था पर आघात होगा।

विहिप अध्यक्ष आलोक गर्ग ने कहा—
“यह कानून न केवल अवैध धर्मांतरण गतिविधियों पर रोक लगाता है, बल्कि महिलाओं, युवतियों और समाज की सांस्कृतिक सुरक्षा के लिए आवश्यक है। हम मांग करते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में इस कानून का मजबूती से पक्ष रखा जाए और इसे पूर्ण रूप से लागू रखा जाए।”

*संत समाज और सर्व समाज का समर्थन*

आज ग़ाज़ियाबाद में “सर्व समाज” बैनर के अंतर्गत नगर के विभिन्न हिंदू संगठनों ने धर्म-स्वातंत्र्य विधेयक के समर्थन में यात्रा निकाली।
धर्माचार्य पंडित अशोक कृष्णा महाराज (राष्ट्रीय अध्यक्ष – सर्व सेवा परिषद) ने कहा—

“इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का भीषण षड्यंत्र देश के भीतर चल रहा है। इसका उद्देश्य हिंदू समाज का धर्मांतरण कर भारत की सांस्कृतिक धरोहर पर कुठाराघात करना है। हम इस कानून का पुरजोर समर्थन करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि—
“धर्म स्वतंत्रता कानून किसी धर्म के विरोध में नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक अखंडता और आध्यात्मिक संतुलन की रक्षा के लिए लाया गया है। संविधान का अनुच्छेद 25 केवल धर्म बदलने की नहीं, अपने धर्म में सुरक्षित रहने की स्वतंत्रता भी देता है। छल, बल या प्रलोभन से कराया गया धर्मांतरण व्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन और समाज की अस्मिता पर आघात है।”

*डासना मंदिर से छोटे यति नरसिंहानंद गिरी का आवाहन*

यति नरसिंहानंद गिरी जी ने कहा—
“समाज इस षड्यंत्र को पहचाने और धर्म-स्वातंत्र्य कानूनों का पुरजोर समर्थन करे। ये कानून केवल हिन्दू समाज ही नहीं, बल्कि भारतीयता के रक्षक हैं।”

*प्रमुख उपस्थितजन*
विहिप अध्यक्ष आलोक गर्ग,
सुभाष बजरंगी, संजय बरनवाल, सत्येंद्र ठाकुर, अजय, सुनील कुमार सहित अनेक संत, धर्माचार्य और संगठन प्रमुख उपस्थित रहे।

*मीडिया संवाद*
न्यूज़ 31 इंडिया के वरिष्ठ संवाददाता रजत शर्मा ने आंदोलन के दौरान संत समाज एवं हिंदू संगठनों के नेताओं से महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे —

*क्या यह आंदोलन केवल कानून समर्थन तक सीमित रहेगा या दीर्घकालिक सामाजिक अभियान के रूप में जारी रहेगा?*

(विहिप अध्यक्ष आलोक गर्ग): “यह केवल प्रदर्शन नहीं, यह समाजिक चेतना का अभियान है। जब तक धर्मांतरण की साजिशें समाप्त नहीं होतीं, यह आंदोलन जारी रहेगा।”

*सुप्रीम कोर्ट में इस कानून के पक्ष में हिन्दू संगठनों की संयुक्त पहल क्या होगी?*

(संत समाज प्रतिनिधि): “हम संगठित होकर सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका (intervention application) दायर करेंगे और कानूनी पक्ष को मजबूत बनाएंगे।”

*क्या इस आंदोलन को अखिल भारतीय स्तर पर ले जाने की योजना है?*

(पंडित अशोक कृष्ण जी महाराज): “हाँ, यह अब राष्ट्रीय स्वरूप लेगा। देश के हर जिले में ‘धर्म सुरक्षा यात्रा’ निकाली जाएगी।”

*धर्मांतरण रोकने में प्रशासनिक तंत्र से क्या अपेक्षाएँ हैं?*

(सुभाष बजरंगी): “प्रशासन को जमीनी स्तर पर सक्रिय रहना चाहिए। फर्जी एनजीओ और मिशनरियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।”

क्या इस कानून को “भारतीय संस्कृति की सुरक्षा” के रूप में जनता के बीच प्रचारित किया जाएगा?

(छोटे यति नरसिंहानंद गिरी): “हाँ, समाज को यह समझाया जाएगा कि धर्म-स्वातंत्र्य कानून केवल हिन्दू समाज का नहीं बल्कि पूरे भारत की आत्मा की रक्षा का माध्यम है।”

प्रेषक:
विश्व हिंदू परिषद (विहिप), ग़ाज़ियाबाद इकाई
रिपोर्ट: रविंद्र आर्यप्रेस विज्ञप्ति

*“धर्म परिवर्तन विरोधी कानून को समाप्त करने का प्रयास हिंदू आस्था पर आघात — ग़ाज़ियाबाद में विहिप और संत समाज हिन्दू संगठनों का विशाल प्रदर्शन”*

*विहिप अध्यक्ष आलोक गर्ग बोले — “यह कानून सनातन संस्कृति की रक्षा का कवच है, सुप्रीम कोर्ट में इसका मजबूती से पक्ष रखा जाए”*

रिपोर्ट: रविंद्र आर्य

ग़ाज़ियाबाद:
विश्व हिंदू परिषद (विहिप), संत समाज एवं हिंदू संगठन परिवार के कार्यकर्ताओं ने आज विहिप अध्यक्ष आलोक गर्ग के नेतृत्व में ज़िला कलक्ट्रेट, ग़ाज़ियाबाद में एक विशाल प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन का उद्देश्य उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए धर्म परिवर्तन विरोधी कानून को सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती का विरोध दर्ज कराना था।

संगठनों ने स्पष्ट कहा कि यह कानून सनातन धर्म और हिंदू समाज की सुरक्षा का कवच है, जिसे समाप्त करने का कोई भी प्रयास हिंदू आस्था पर आघात होगा।

विहिप अध्यक्ष आलोक गर्ग ने कहा—
“यह कानून न केवल अवैध धर्मांतरण गतिविधियों पर रोक लगाता है, बल्कि महिलाओं, युवतियों और समाज की सांस्कृतिक सुरक्षा के लिए आवश्यक है। हम मांग करते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में इस कानून का मजबूती से पक्ष रखा जाए और इसे पूर्ण रूप से लागू रखा जाए।”

*संत समाज और सर्व समाज का समर्थन*

आज ग़ाज़ियाबाद में “सर्व समाज” बैनर के अंतर्गत नगर के विभिन्न हिंदू संगठनों ने धर्म-स्वातंत्र्य विधेयक के समर्थन में यात्रा निकाली।
धर्माचार्य पंडित अशोक कृष्णा महाराज (राष्ट्रीय अध्यक्ष – सर्व सेवा परिषद) ने कहा—

“इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का भीषण षड्यंत्र देश के भीतर चल रहा है। इसका उद्देश्य हिंदू समाज का धर्मांतरण कर भारत की सांस्कृतिक धरोहर पर कुठाराघात करना है। हम इस कानून का पुरजोर समर्थन करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि—
“धर्म स्वतंत्रता कानून किसी धर्म के विरोध में नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक अखंडता और आध्यात्मिक संतुलन की रक्षा के लिए लाया गया है। संविधान का अनुच्छेद 25 केवल धर्म बदलने की नहीं, अपने धर्म में सुरक्षित रहने की स्वतंत्रता भी देता है। छल, बल या प्रलोभन से कराया गया धर्मांतरण व्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन और समाज की अस्मिता पर आघात है।”

*डासना मंदिर से छोटे यति नरसिंहानंद गिरी का आवाहन*

यति नरसिंहानंद गिरी जी ने कहा—
“समाज इस षड्यंत्र को पहचाने और धर्म-स्वातंत्र्य कानूनों का पुरजोर समर्थन करे। ये कानून केवल हिन्दू समाज ही नहीं, बल्कि भारतीयता के रक्षक हैं।”

*प्रमुख उपस्थितजन*
विहिप अध्यक्ष आलोक गर्ग,
सुभाष बजरंगी, संजय बरनवाल, सत्येंद्र ठाकुर, अजय, सुनील कुमार सहित अनेक संत, धर्माचार्य और संगठन प्रमुख उपस्थित रहे।

*मीडिया संवाद*
न्यूज़ 31 इंडिया के वरिष्ठ संवाददाता रजत शर्मा ने आंदोलन के दौरान संत समाज एवं हिंदू संगठनों के नेताओं से महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे —

*क्या यह आंदोलन केवल कानून समर्थन तक सीमित रहेगा या दीर्घकालिक सामाजिक अभियान के रूप में जारी रहेगा?*

(विहिप अध्यक्ष आलोक गर्ग): “यह केवल प्रदर्शन नहीं, यह समाजिक चेतना का अभियान है। जब तक धर्मांतरण की साजिशें समाप्त नहीं होतीं, यह आंदोलन जारी रहेगा।”

*सुप्रीम कोर्ट में इस कानून के पक्ष में हिन्दू संगठनों की संयुक्त पहल क्या होगी?*

(संत समाज प्रतिनिधि): “हम संगठित होकर सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका (intervention application) दायर करेंगे और कानूनी पक्ष को मजबूत बनाएंगे।”

*क्या इस आंदोलन को अखिल भारतीय स्तर पर ले जाने की योजना है?*

(पंडित अशोक कृष्ण जी महाराज): “हाँ, यह अब राष्ट्रीय स्वरूप लेगा। देश के हर जिले में ‘धर्म सुरक्षा यात्रा’ निकाली जाएगी।”

*धर्मांतरण रोकने में प्रशासनिक तंत्र से क्या अपेक्षाएँ हैं?*

(सुभाष बजरंगी): “प्रशासन को जमीनी स्तर पर सक्रिय रहना चाहिए। फर्जी एनजीओ और मिशनरियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।”

क्या इस कानून को “भारतीय संस्कृति की सुरक्षा” के रूप में जनता के बीच प्रचारित किया जाएगा?

(छोटे यति नरसिंहानंद गिरी): “हाँ, समाज को यह समझाया जाएगा कि धर्म-स्वातंत्र्य कानून केवल हिन्दू समाज का नहीं बल्कि पूरे भारत की आत्मा की रक्षा का माध्यम है।”

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