एक ही फर्म, एक ही बैंक खाता और पांच अलग-अलग वाहनों के नाम पर भुगतान; सरपंच और सचिव की भूमिका पर उठे सवाल, तीन साल के रिकॉर्ड की जांच की मांग
संतोष कुमार मिश्रा | समाज जागरण
उमरिया। मध्य प्रदेश के उमरिया जिले की जनपद पंचायत पाली अंतर्गत ग्राम पंचायत धनवाही में वाहन किराये के नाम पर किए गए भुगतानों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पंचायत के सामने आए पांच बिलों में एक ही फर्म के माध्यम से पांच अलग-अलग वाहनों के नाम पर कुल 20,500 रुपये का भुगतान दर्शाया गया है। इनमें कुछ बिल मुख्यमंत्री के आगमन के नाम पर बनाए गए हैं, जबकि एक बिल में खनिज परिवहन का उल्लेख है। दस्तावेजों के आधार पर इन भुगतानों की पारदर्शिता और प्रक्रिया को लेकर जांच की मांग उठाई गई है।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, पांचों बिल दिव्या यादव, ग्राम सेमरिया, जिला उमरिया के नाम से जारी किए गए हैं। सभी बिलों पर एक ही फर्म का विवरण और एक ही बैंक खाते का उल्लेख है। आरोप है कि ग्राम पंचायत की सरपंच छोटी बाई और सचिव के हस्ताक्षर एवं मुहर से इन भुगतानों को स्वीकृति दी गई।
पांच बिलों में 20,500 रुपये का भुगतान
उपलब्ध बिलों के अनुसार भुगतान का विवरण इस प्रकार है—
- बिल क्रमांक 44, दिनांक 25 अक्टूबर 2022: वाहन नंबर MP 17 ZA 1482 (पिकअप) के नाम पर 4,900 रुपये। बिल में खनिज ले जाने का उल्लेख है।
- बिल क्रमांक 42, दिनांक 30 नवंबर 2022: वाहन नंबर MP 54 T 0666 (बोलेरो) के नाम पर 4,700 रुपये।
- बिल क्रमांक 43, दिनांक 23 दिसंबर 2022: वाहन नंबर MP 54 Z 1817 (बोलेरो) के नाम पर मुख्यमंत्री आगमन के लिए 3,000 रुपये।
- बिल क्रमांक 40, दिनांक 29 दिसंबर 2022: वाहन नंबर MP 54 T 1061 (बोलेरो) के नाम पर मुख्यमंत्री आगमन के लिए 3,000 रुपये।
- बिल क्रमांक 41, दिनांक 3 दिसंबर 2024: वाहन नंबर MP 54 BN 4726 (बोलेरो) के नाम पर मुख्यमंत्री आगमन के लिए 4,900 रुपये।
इस प्रकार पांचों बिलों में कुल 20,500 रुपये का भुगतान दर्शाया गया है। खास बात यह है कि अक्टूबर से दिसंबर 2022 के बीच चार बिल जारी किए गए, जबकि पांचवां बिल दिसंबर 2024 का है।
मुख्यमंत्री आगमन के नाम पर वाहन किराये का भुगतान क्यों?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री के आगमन के नाम पर ग्राम पंचायत द्वारा निजी वाहनों के किराये का भुगतान किस आदेश और किस मद के तहत किया गया? मुख्यमंत्री जैसे विशिष्ट अतिथि के दौरे पर वाहन एवं अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सामान्यतः जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के समन्वय से तय होती है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि क्या जिला प्रशासन की ओर से ग्राम पंचायत को वाहन व्यवस्था करने का कोई लिखित निर्देश दिया गया था?
यदि ऐसा कोई आदेश जारी हुआ था तो उसकी प्रति, वाहन उपयोग का विवरण और भुगतान की स्वीकृति सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित वाहनों का उपयोग किस अधिकारी या आयोजन के लिए किया गया था।
एक ही फर्म को पांच बार भुगतान, कोटेशन और लॉगबुक पर सवाल
पांचों बिलों में एक ही फर्म का नाम, बैंक खाते का विवरण और अन्य जानकारियां दर्ज होने से भुगतान प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। यह जांच का विषय है कि वाहन किराये पर लेने के लिए नियमानुसार कोटेशन आमंत्रित किए गए थे या नहीं। क्या पंचायत की बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव पारित हुआ था? क्या वाहनों के उपयोग की लॉगबुक उपलब्ध है?
वाहनों की लॉगबुक में यात्रा का मार्ग, दूरी, उपयोग की अवधि, चालक का नाम और वाहन इस्तेमाल करने वाले अधिकारी का विवरण होना चाहिए। इन अभिलेखों की जांच से भुगतान की वास्तविकता स्पष्ट हो सकती है।
इसके अलावा संबंधित फर्म के पंजीयन, वाहनों के वैध परमिट और भुगतान की पात्रता की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है।
खनिज परिवहन वाले बिल ने भी खड़े किए सवाल
25 अक्टूबर 2022 के बिल में पिकअप वाहन नंबर MP 17 ZA 1482 के माध्यम से खनिज ले जाने का उल्लेख किया गया है। इस बिल के संबंध में भी कई सवाल सामने आए हैं। खनिज किस स्थान से कहां ले जाया गया? परिवहन किस कार्य के लिए किया गया? क्या संबंधित सामग्री का कोई वैध बिल और आवश्यक परिवहन दस्तावेज उपलब्ध हैं? क्या इस भुगतान को खनिज परिवहन के मद में दर्ज किया गया या किसी अन्य मद से भुगतान किया गया?
इन सभी बिंदुओं की जांच आवश्यक है, ताकि भुगतान की वास्तविकता और सरकारी धन के उपयोग की स्थिति स्पष्ट हो सके।
तीन वर्षों के पंचायत रिकॉर्ड की जांच की मांग
मामले को लेकर मांग की जा रही है कि कलेक्टर उमरिया, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत उमरिया और जनपद पंचायत करकेली के मुख्य कार्यपालन अधिकारी इस प्रकरण का संज्ञान लें। ग्राम पंचायत धनवाही के पिछले तीन वर्षों के कैशबुक, बिल-वाउचर, बैंक स्टेटमेंट, वाहन लॉगबुक, पंचायत प्रस्ताव और भुगतान संबंधी अभिलेखों का ऑडिट कराया जाए।
जांच में यदि वित्तीय अनियमितता या फर्जी भुगतान प्रमाणित होता है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा शासकीय राशि की वसूली भी सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर भुगतान की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। मामले में सरपंच छोटी बाई और पंचायत सचिव का पक्ष प्राप्त नहीं हुआ है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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