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तीन साल बाद भी अधूरा बकहो का प्रवेश द्वार और सीमा बोर्ड भी नदारद

2023 में जैतपुर विधायक मनीषा सिंह ने किया था शिलान्यास, ठेकेदार पर मेहरबानी से उठ रहे सवाल

अमलाई। नगर परिषद बकहो की पहचान आखिर कहां है? वर्ष 2023 में जैतपुर की तत्कालीन विधायक मनीषा सिंह द्वारा नगर परिषद के प्रवेश द्वार का शिलान्यास किया गया था। उम्मीद थी कि जल्द ही बकहो को एक आकर्षक प्रवेश द्वार मिलेगा, लेकिन करीब तीन साल बीत जाने के बाद भी मौके पर केवल अधूरे पिलर नजर आ रहे हैं। प्रवेश द्वार निर्माण के लिए टेंडर होने के बावजूद काम पूरा नहीं हो पाना नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।

शिलान्यास हुआ, टेंडर भी निकला, फिर निर्माण अधूरा क्यों?

किसी भी नगर परिषद का प्रवेश द्वार केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि उस क्षेत्र की पहचान और विकास का प्रतीक होता है। बकहो में प्रवेश द्वार निर्माण की शुरुआत को लेकर लोगों में उम्मीद जगी थी, लेकिन वर्षों बाद भी वह उम्मीद पूरी होती नजर नहीं आ रही है।

जब इस निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर काम समय पर पूरा क्यों नहीं हुआ? क्या ठेकेदार ने निर्धारित समय-सीमा में काम पूरा नहीं किया? क्या उसे अतिरिक्त मोहलत दी गई? यदि मोहलत दी गई, तो उसकी वजह क्या थी और अब तक निर्माण पूरा कराने के लिए क्या कार्रवाई की गई?
आखिर टेंडर होने और शिलान्यास के बाद भी प्रवेश द्वार का निर्माण अधूरा रहने की जिम्मेदारी किसकी है—ठेकेदार की, निगरानी करने वाले अधिकारियों की या फिर उन जनप्रतिनिधियों की, जिन्हें विकास कार्यों की प्रगति पर नजर रखनी चाहिए?

ठेकेदार को आखिर कितनी मोहलत, जनता को कब मिलेगी राहत?

प्रवेश द्वार का निर्माण कार्य वर्षों से अधूरा रहने के मामले में ठेकेदार को दी गई मोहलत भी जांच और जवाबदेही का विषय है। यदि निर्धारित समय में काम पूरा नहीं किया गया, तो नगर परिषद ने अनुबंध की शर्तों के तहत क्या कार्रवाई की? क्या देरी के लिए कोई जुर्माना लगाया गया या काम पूरा कराने के लिए अंतिम समय-सीमा तय की गई?

इन सवालों का जवाब इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि सार्वजनिक निर्माण कार्यों में देरी का सीधा असर क्षेत्र के विकास और सरकारी व्यवस्था पर जनता के भरोसे पर पड़ता है। नगर परिषद को कार्यादेश, निर्माण की समय-सीमा, अब तक की प्रगति और देरी के कारणों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।

नगर परिषद की पहचान के लिए सीमा बोर्ड तक नहीं!

हैरानी की बात यह भी है कि स्थानीय लोगों के बीच नगर परिषद क्षेत्र की सीमा पर पहचान संबंधी बोर्ड नहीं होने को लेकर चर्चा है। जिस निकाय की जिम्मेदारी अपने क्षेत्र की पहचान और विकास को मजबूत करना है, उसी क्षेत्र में प्रवेश करने पर उसकी स्पष्ट पहचान नजर नहीं आना नगर परिषद पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

विधायक और नगर परिषद के जनप्रतिनिधियों से सवाल

वर्ष 2023 में प्रवेश द्वार का शिलान्यास जैतपुर विधायक द्वारा किया गया था। ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि शिलान्यास के बाद निर्माण कार्य की प्रगति को लेकर क्या पहल की गई? क्या संबंधित विभाग या नगर परिषद से काम की स्थिति की जानकारी ली गई? यदि प्रयास किए गए, तो उनका परिणाम अब तक सामने क्यों नहीं आया?

वहीं, नगर परिषद के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों को भी जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। विकास कार्यों की जिम्मेदारी केवल शिलान्यास करने तक सीमित नहीं हो सकती।

तीन साल की देरी, जवाबदेही तय होनी चाहिए

नगर परिषद बकहो के प्रवेश द्वार की मौजूदा स्थिति कई सवाल खड़े करती है। टेंडर होने के बावजूद निर्माण अधूरा क्यों है? ठेकेदार को कितनी मोहलत दी गई? काम पूरा कराने के लिए क्या कदम उठाए गए? और नगर परिषद क्षेत्र की सीमा पर पहचान बोर्ड कब लगाया जाएगा?

इनका कहना
ठेकेदार को समय समय पर अधूरे निर्माण के लिए कहा गया है ठेकेदार ने निर्माण पूरा करने के लिए 10 दिनों का समय और मांगा है
मौसमी केवट, अध्यक्ष नगर परिषद बकहो


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