प्रीतम कुमार पाठक
बेगूसराय, बिहार
परीक्षाओं का मौसम शुरू हो गया है। केंद से राज्य स्तर तक की संस्था इसकी तैयारी में लगी हैं। इन सबके केन्द्र में है आज का छात्रवर्ग । इनके मन में एक अलग ही तनाव और चिंता का माहौल घर कर जाता है। छात्रों के बीच परीक्षा का भय इस कदर व्याप्त होता है कि वो अपनी सम्पूर्ण प्रतिभा और वर्षभर की मेहनत को बेकार कर देते हैं । ऐसे में इस पर बात करना आवश्यक प्रतीत होता है । क्योंकि यह समय उनके शैक्षिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो उन्हें भविष्य के लिए मानसिक और भावनात्मक विकास को मजबूती प्रदान करता है । छात्र और अभिभावक यदि कुछ
बातों का ध्यान में रखें तो परीक्षा के तनाव को बहुत हद तक कम किया जा सकता है ।
दवाब, चिंता, और तनाव का कारण-
परीक्षाओं के दरम्यान छात्रों के मन में तनाव और चिंता का इस कदर बढ़ जाना इसका प्रमाण है कि वे अपने भविष्य के प्रति अधिक चिंता करते हैं, अपने अभिभावकों की उम्मीदों को पूरा करने का दबाव महसूस करते हैं। यह तनाव और चिंता उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। साथ ही, उनके प्रदर्शन को भी प्रभावित करता है।
परीक्षा का दबाव छात्रों के लिए बहुत अधिक होने पर उन्हें तनाव, अवसाद, और अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी परीक्षा किस काम की जो अच्छे खासे स्वस्थ छात्र को मरीज बना दे!
परीक्षाओं का सामना करने के लिए छात्र और अभिभावक को कुछ सामान्य बातों को समझना होगा। जिसे अमल में लाकर इस भय, तनाव को भगाया जा सकता है-
1.समय प्रबंधन करना बहुत महत्वपूर्ण है। अध्ययन की अवधि को छोटे-छोटे अंतराल में बाँट कर पढ़ने से समझने में आसानी होती है। समय का सही प्रबंधन प्रत्येक छात्र के लिए जरूरी होता है। अपने स्वयं की समय-सारणी बनाकर
उसे उपयोग में लाये।
- छात्रों को सम्बंधित विषय की पाठ्य-पुस्तक को अच्छी तरह से पढ़ना चाहिए। स्वयं के द्वारा तैयार नोट्स को नियमित रूप से अध्ययन करते रहना चाहिए।
- छात्रों को अपने स्वास्थ्य का ध्यान भी देना चाहिए। कहा गया है कि “स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का वास होता है।”
संतुलित और पोषणयुक्त आहार का सेवन नियमित रूप से करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ होता है। - छात्रों को नियमित रूप से पढ़ने के साथ-साथ व्यायाम
पर भी ध्यान देना चाहिए। ताकि यादाश्त बना रहे। नकारात्मक विचार मन में न आये। - सोच सकारात्मक हो तो नई ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए छात्रों अपने आप पर विश्वास करना चाहिए। अपने आत्मबल को दृढ़ रखना चाहिए।
परीक्षाओं के इस माहौल में माता-पिता से यह आशा है कि अपने बच्चे के भय व तनाव को कम करने का प्रयास करें। व्यर्थ का दवाब बना कर उन्हें परेशान न करें । अपने अच्छे की तुलना अन्य से करके उनके भीतर हीनभावना को विकसित न होने दें। उनसे बातचीत करें। यदि बच्चा तनाव महसूस करे हो कारण जानने का प्रयास करें । इन सावधानी को अपना कर परीक्षा के तनाव को कम किया जा सकता है।



