कुलदीप सिंह
लखीमपुर-खीरी। दुधवा नेशनल पार्क से लगते पलिया क्षेत्र में बीती रात हाथियों के झुंड ने 45 वर्षीय किसान राम बहादुर पर हमला कर मौत के घाट उतार दिया। घटना रात करीब 1 बजे वनगई रेंज के चोखड़ा फार्म गॉंव के पास खेत में गश्त के दौरान हुई। हाथियों के झुंड ने किसान को बेरहमी से कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। शव के कान, नाक और मुंह से खून बहता मिला तथा जीभ गंभीर रूप से कटकर बाहर लटक गई थी। इस भयावह घटना से पूरे इलाके में दहशत फैल गई है।
कैसे हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार राम बहादुर अपने साथियों लालता और सुशील के साथ फसल की रखवाली करने खेत पर पहुंचे थे। पिछले कई दिनों से हाथियों का आतंक होने के कारण किसान रात में भी खेत नहीं छोड़ रहे थे। तीनों किसान खेत के किनारे चौकसी कर रहे थे तभी अचानक घास की सरसराहट और भारी पैरों की आवाज सुनाई दी।
टोर्च की रोशनी पड़ते ही 10–12 हाथियों का बड़ा झुंड सामने दिखाई दिया। घबराकर तीनों किसानों ने शोर मचाया, मगर इसी दौरान हाथी हमलावर हो गए। लालता और सुशील किसी तरह जान बचाकर भाग निकले, लेकिन राम बहादुर झुंड के बीच फंस गए और कुछ ही पलों में हाथियों ने उन्हें रौंद डाला।
गांव में हाहाकार
शोर सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक राम बहादुर की मौत हो चुकी थी। खबर गांव पहुंचते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। ग्रामीणों ने बताया कि कई दिनों से हाथियों के झुंड द्वारा गन्ना, गेहूं और मसूर की फसलों को नष्ट किया जा रहा था।
किसानों का कहना है कि “अब डर है कि फसल बचाएं या अपनी जान।”
वन विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप
ग्राम प्रधान सहित ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हाथियों की लगातार मूवमेंट की सूचना कई बार वन विभाग को दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ग्राम प्रधान ने कहा—
“अगर वन विभाग समय रहते सक्रिय होता तो आज राम बहादुर की जान बच सकती थी। दावों के बावजूद हाथी बार-बार गांव में लौट आते हैं।”
ग्रामीणों ने मांग की कि—
- गांव में रात की पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए,
- हाथियों की मूवमेंट पर ड्रोन निगरानी हो,
- पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए,
- हाथियों के रोकथाम के लिए वन विभाग ठोस योजना बनाए।
वन विभाग का बयान
दुधवा नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर एच. राजा मोहन ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा—
“रात में हाथियों के हमले से एक किसान की मौत हुई है। तीन किसान खेत की रखवाली कर रहे थे और हाथियों को भगाने की कोशिश में वे झुंड के निशाने पर आ गए।”
उन्होंने यह भी बताया कि इस बार नेपाल से आने वाले हाथियों की मूवमेंट अधिक है, जिसके चलते ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं।
वन विभाग की टीम गठित कर दी गई है और सूचना मिलते ही हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने का अभियान चल रहा है।
यह घटना क्षेत्र में वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को फिर उजागर करती है और ग्रामीणों में असुरक्षा की भावना बढ़ा रही है।
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