वर्षा बाढ़ तथ तूफान से हुए नुकसान के बदले किसानों को मिलेगी मुआवजा

समाज जागरण पटना जिला संवाददाता:- वेद प्रकाश

पटना/ भारी बारिश, बाढ़ और मोन्था चक्रवात से बिहार के 12 जिलों में किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। ऐसे प्रभावित किसानों को राहत देते हुए राज्य के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने बुधवार को बताया कि राज्य सरकार ने क्षतिग्रस्त फसलों का सर्वेक्षण और आकलन पूरा कर लिया है और अब किसानों को कृषि इनपुट सब्सिडी के रूप में मुआवजा देने का निर्णय लिया है। इसके लिए पात्र किसानों को 2 दिसंबर 2025 तक विभागीय वेबसाइट dbtagriculture.bihar.gov.in पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य है। मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदा से हुई क्षति से किसान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, इसलिए उनकी सहायता करना सरकार की प्राथमिकता है। विभागीय विज्ञप्ति के अनुसार, 12 जिलों के 39 प्रखंडों की 397 पंचायतों में फसल भूमि को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इन क्षेत्रों में मॉनसून के दौरान हुई भारी बारिश, अचानक आई बाढ़ और मोन्था चक्रवात के कारण धान, मक्का, सब्जी सहित कई फसलों की पैदावार प्रभावित हुई है। किसानों को उनकी फसल भूमि के प्रकार और गुणवत्ता के आधार पर तीन अलग-अलग दरों पर मुआवजा राशि दी जाएगी। असिंचित (बारानी) भूमि अधिकतम 2 हेक्टेयर तक, 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर सिंचित भूमि अधिकतम 2 हेक्टेयर तक 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर बहु-फसलीय भूमि (जिसमें गन्ना खेती वाली भूमि भी शामिल है) अधिकतम 2 हेक्टेयर तक 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर दिया जाएगा। कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजा जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि किसानों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाई जा सके ताकि वे अगली फसल के लिए तैयारी कर सकें। सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों के लिए न्यूनतम देय दरें भी तय की हैं। असिंचित भूमि: 1,000 रुपये, सिंचित भूमि: 2,000 रुपये, बहु-फसलीय भूमि: 2,500 रुपये यह राशि ऐसे किसानों को दी जाएगी जिनकी फसल क्षति कम क्षेत्र में हुई है, लेकिन वे आर्थिक स्थिति से कमजोर हैं। जिन जिलों में फसल क्षति दर्ज की गई है, उनमें शामिल हैं बेगूसराय, पूर्वी चंपारण, कैमूर, मधुबनी, किशनगंज, गया, भोजपुर, मधेपुरा, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, शिवहर और सुपौल। मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों की सहायता करना सरकार की प्रतिबद्धता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अंतिम तिथि से पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पूरा कर लें, ताकि उन्हें समय पर मुआवजा मिल सके। इस राहत पैकेज से उम्मीद की जा रही है कि प्रभावित किसानों को अपने नुकसान की भरपाई में सहायता मिलेगी और वे आगामी रबी सीजन की खेती सुचारू रूप से शुरू कर सकेंगे।

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