*गाजियाबाद का ‘संडे बाजार’ : अवैध व्यापार, प्रशासनिक चुप्पी और शहर की सुरक्षा पर मंडराता खतरा*



*‘दुल्हन’ की तरह सजा अवैध पैठ बाजार — नगर निगम की आँख-मिचौली और पुलिस की खामोशी का खुला सबूत*

विशेष रिपोर्ट : रविंद्र आर्य
गाजियाबाद

गाजियाबाद में हर रविवार लगने वाला अनियंत्रित संडे बाजार अब केवल अवैध व्यापार का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह शहर की सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और प्रशासनिक निष्क्रियता का जीवंत उदाहरण बन चुका है। बिना किसी वैध अनुमति, पंजीकरण, पहचान और नियंत्रण के शहर के बीचों-बीच लगने वाला यह बाजार न सिर्फ ईमानदार व्यापारियों की कमर तोड़ रहा है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी गंभीर संकट बन चुका है।



शहर के व्यापार, चौपला, पुरानी मंडी, नई बस्ती, घंटाघर, कन्या वैदिक मार्ग, गोल मार्केट, जीटी रोड जैसे व्यस्ततम इलाकों में हर रविवार सड़कों पर अतिक्रमण कर लगने वाला यह बाजार पूरे शहर को जाम में धकेल देता है। स्थिति यह हो जाती है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाएं तक फंस जाती हैं।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि वर्षों से लाइसेंस, टैक्स, जीएसटी और नगर निगम की एनओसी लेकर व्यापार करने वाले दुकानदारों का कारोबार इस अवैध बाजार ने बर्बाद कर दिया है। नियमों से बंधे व्यापारी घाटे में जा रहे हैं, जबकि बिना किसी जिम्मेदारी के सड़क पर बैठे अवैध कारोबारी खुलेआम मुनाफा कमा रहे हैं।
इसी कारण शहर भर के बाजारों मे पेठ बाजार हटाओ के पोस्टर बैनर लगाए गये जिसका सभी क्षेत्र वासी ओर व्यापारी विरोध करते है ब्लैक एंड वाइट पोस्टर लगाकर विरोध किया।

*प्रशासन मौन, व्यापारी आक्रोशित — राजू छाबड़ा का सीधा हमला*

इस पूरे मामले को लेकर उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के युवा प्रदेश महामंत्री राजू छाबड़ा ने अवैध पैठ बाजार के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। रविवार को सैकड़ों व्यापारियों के साथ उन्होंने धरना-प्रदर्शन कर प्रशासन की चुप्पी पर सवाल खड़े किए।

राजू छाबड़ा ने कहा कि पहले पैठ बाजार नवयुग मार्केट में लगता था। वहां से हटाने के बाद यह तय हुआ था कि बाजार शहर से बाहर लगाया जाएगा, लेकिन इसके उलट अब इसे शहर के सबसे व्यवस्थित और संवेदनशील इलाकों में जबरन लगाया जा रहा है। इसका सीधा असर स्थानीय व्यापार, यातायात और नागरिक सुरक्षा पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा, “जब जनता ही बाजार तक नहीं पहुंच पाएगी, जब हर रविवार शहर जाम रहेगा, तो व्यापार कैसे चलेगा? यह केवल व्यापार का मुद्दा नहीं, यह शहर की सुरक्षा का सवाल है।”

*‘दुल्हन’ की तरह सजा अवैध बाजार — कानून का मज़ाक*

सबसे चौंकाने वाली तस्वीर तब सामने आई, जब नगर निगम ने संडे बाजार को अवैध बताते हुए कुछ घंटों के लिए दिखावटी कार्रवाई की। लेकिन कुछ ही समय बाद वही बाजार पहले से अधिक सजा-संवरा कर दोबारा लग गया — मानो ‘दुल्हन’ की तरह सजाकर कानून को खुली चुनौती दी गई हो।

व्यापारियों का आरोप है कि नगर निगम और पुलिस के बीच जिम्मेदारी टालने का खेल चल रहा है। कागजों में कार्रवाई और ज़मीनी हकीकत में पूर्ण चुप्पी। न कोई स्थायी समाधान, न कोई जवाबदेही।

*सुरक्षा का बड़ा खतरा, कोई रिकॉर्ड नहीं*

राजू छाबड़ा ने गंभीर चेतावनी देते हुए कहा कि इन अवैध बाजारों में बाहर से आने वाले लोगों की कोई पहचान, कोई पंजीकरण और कोई रिकॉर्ड नहीं होता। इससे चोरी, जेबकतरी, छेड़छाड़ और अन्य आपराधिक घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

उन्होंने कहा कि चौपला, घंटाघर और नई बस्ती जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पैठ बाजार लगने से स्थानीय लोगों के लिए स्थिति भयावह हो गई है। अगर किसी के साथ कोई दुर्घटना या आपात स्थिति हो जाए, तो न इलाज संभव है, न बचाव।

*गंदगी, जाम नालियां और नागरिकों की दुश्वारियां*

पैठ बाजारों के चलते घरों के सामने कूड़ा-कचरा फेंका जाता है, जिससे नालियां जाम हो चुकी हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर रविवार के बाद पूरा इलाका कचरे के ढेर में तब्दील हो जाता है, लेकिन सफाई और जिम्मेदारी का कोई तंत्र नहीं है।

वरिष्ठ व्यापारी अरुण मित्तल ने मांग की कि पैठ बाजार को शहर से बाहर किसी खाली मैदान में लगाया जाए और केवल गाजियाबाद के स्थानीय लोगों को ही बाजार लगाने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि स्कूटी या ठेले पर छोटे स्तर पर व्यापार करने वालों को कोई आपत्ति नहीं, लेकिन ट्रैक्टर-ट्रॉली और टाटा 407 में भरकर माल लाने वालों को क्यों नहीं रोका जाता?

*राजनीतिक आश्वासन, व्यापारी सतर्क*

व्यापारियों की समस्या को लेकर गाजियाबाद शहर विधायक संजीव शर्मा और महापौर सुनीता दयाल ने फोन पर धरना स्थल को संबोधित किया और विश्वास दिलाया कि अवैध पैठ बाजार को शहर के बीचों-बीच से हटाया जाएगा।

हालांकि व्यापारी समुदाय का कहना है कि अब उन्हें आश्वासन नहीं, ठोस और स्थायी कार्रवाई चाहिए।

*धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में व्यापारी शामिल*

इस आंदोलन में युवा व्यापार मंडल अध्यक्ष अनिल बंसल, मेरठ मंडल अध्यक्ष, मंडल महामंत्री गौरव गर्ग, अरुण मित्तल सहित सैकड़ों व्यापारी शामिल रहे।
धरना-प्रदर्शन में सुरेश महाजन, संजीव लोहरीया, हरि मेहता, धर्मपाल कुकरजा, सुभाष चंद शर्मा, नरेंद्र रंजन गुप्ता, ललित सिंघल, विनय सिंघल, नीरज सिंह, रंजन यादव, आकाश कटियार, प्रवीन शर्मा, संजीव वाल्मीकि, सचिन हिन्दू, नरेश प्रधान, दीपक पाटल, राजेंद्र नेगी, सुमित गोयल, पवन महाजन, तिलक महाजन, कमल बंसल, नवल मेहता सहित विभिन्न बाजारों के सैकड़ों व्यापारी मौजूद रहे।

यह सवाल अब सिर्फ संडे बाजार या पैठ बाजार का नहीं रह गया है।
सवाल यह है — गाजियाबाद में कानून चलेगा या अव्यवस्था?
अगर प्रशासन ने अब भी आंखें मूंदे रखीं, तो यह संकट आने वाले समय में और गहराएगा।

🛍️ Today’s Best Deals

(Advertisement)