पर्यावरण प्रेमी महावीर चहल ने बताया कि गोकलपुरा का मकडाना जोहड़ सदियों तक नवाब व राजस्व विभाग को बेस कीमती भू-लगान चुकता कर गांव के बुजुर्गों ने चारागाह के रूप में रखा था
दैनिक समाज जागरण, ( महेन्द्र जावला बहल )
बहल, 25 नवंबर। बहल के निकटवर्ती गांव गोकलपुरा में स्थापित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के पोषक अनाज अनुसंधान केंद्र प्रशासन वी वन विभाग की पर्यावरण को क्षति पहुंचाने की कार्रवाई के खिलाफ ग्रामीणों ने सांकेतिक सड़क जाम व विरोध धरना दे और हवन कर रोष जताया गया। वन विभाग व स्थापित अनाज अनुसंधान केंद्र प्रशासन के खिलाफ 10 दिसंबर को बड़े प्रदर्शन व भावी रणनीति पर विचार करने के लिए महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। यह जानकारी पर्यावरण प्रेमी एवं आज के प्रदर्शन के अध्यक्ष महावीर चहल ने दी। महावीर चहल ने बताया कि गोकलपुरा का मकडाना जोहड़ सदियों तक नवाब व राजस्व विभाग को बेस कीमती भू-लगान चुकता कर गांव के बुजुर्गों ने चारागाह के रूप में रखा था। जिस पंचायत न प्रति एकड़ प्रति वर्ष मात्र एक रूपया की पट्टे की दर पर 99 वर्षों के लिए कृषि विश्वविद्यालय को बर्बाद करने के लिए दे दिया। जोहड़ में सदियों पुराने प्रतिबंध वृक्ष जाल कैर व खैर जाटी आदि को अवैध रूप से बिना अनुमति के काट व उखाड़ कर तहस-जस किया जा रहा है। ग्रामीण इसको बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। बावजूद इसके वन विभाग कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है और ना ही कृषि विश्वविद्यालय प्रशासन पेड़ों को उखाड़ने से गुरेज कर रहा है। महावीर चहल ने बताया कि सड़क किनारे के पेड़ के काटने पर वन विभाग एक पेड़ की कटान पर हजारों रुपए का जुर्माना करता है और मकडाना जोहड़ में अनुसंधान केंद्र पेड़ उखड़ता है तो उसका दंड मात्रा 3500 रूपए जुर्माना करता है। इससे लगता है कि वन विभाग के अधिकारी और अनुसंधान केंद्र प्रशासन आपसी मिलीभगत करके पर्यावरण को जिस कदर क्षति पहुंचा रहा है। इसको लेकर जिला प्रशासन व सरकार भी मौन है।
एक जाल व कैर के पेड़ को तैयार करने में सदी गुजर जाती है। जब जाकर कहीं एक पेड़ तैयार होता है। ऐसे पेड़ों को रात के अंधेरे में बिना अनुमति जेसीबी की मदद से उखाड़ कर फेंक दिया जाता है। पेड़ों के उखाड़ने से किस कदर जीव, जंतु, पशु पक्षी की आत्मा को गहरी ठेस पहुंचती है। यह समझने को लेकर प्रशासन इन्हीं के साथ खड़ा दिखाई देता है। लेकिन पेड़ों को उखाड़ कर फेंकने और कटवाने वालों का पर्यावरण के प्रति कोई लगाव नहीं है और ना ही नियम कानून कायदों की कोई परवाह। ऐसे में पेड़ों को काटने से रोकने के लिए गोकलपुरा और क्षेत्र के लोग बड़ा आंदोलन करेंगे। इसके लिए प्रदेश व दूसरे राज्यों के पर्यावरण संगठनों, किसान संगठनों, पंचायत, सामाजिक संस्थाओं को शामिल करने का अभियान चलाया जाएगा और बड़े लेवल पर आंदोलन चलाकर दिल्ली तक भी जाना पड़ेगा तो लोग पीछे नहीं हटेंगे। 10 दिसंबर की महापंचायत में हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी तक मामले को ले जाने पर गंभीरता से विचार होगा।
इस मौके पर सुरेंद्र सिंह खिचड़ पंच ग्राम पंचायत गोकलपुरा , प्रदीप कादियान , फौजी हनुमान महिला, पवन शिलायच, बाबा नोमीनाथ , बाबा बलबीर गिरी समुंद्र नाथ, राजकुमार वशिष्ठ, रामफल पूनिया, अशोक शिलायच, राजपाल सांगवान, धर्मवीर पूनिया, प्रवीण काला, कृष्ण श्योराण, विजय पूनिया, राजेश काजल, प्रदीप खिचड़, योगी करण सिंह जोगी, राजपाल कटारिया, धन सिंह कटारिया, जगदीश भगत व अन्य ग्रामीण मौजूद थे।
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