मुख्यमंत्री और पशुपालन मंत्री से तात्कालिक हस्तक्षेप की अपील
श्रीभूमि संवाददाता
एशिया के सबसे बड़े जलाशयों में शामिल सोनबिल क्षेत्र के किसान और हंस पालन करने वाले परिवार इन दिनों गहरे संकट से जूझ रहे हैं। मौसम की शुरुआत में अज्ञात बीमारी फैलने से हजारों हंसों की मौत हो गई है, जिससे हंस पालकों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
हंस पालन सोनबिल क्षेत्र के हजारों परिवारों के लिए आय का मुख्य स्रोत है। लेकिन अचानक फैले इस रहस्यमय रोग ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है। किसान बताते हैं कि हंसों की लगातार हो रही मौत के कारण वे न तो बाजार में हंस बेच पा रहे हैं और न ही लिए गए ऋण चुका पा रहे हैं। कई परिवारों का अब दैनिक खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है।

किसानों का कहना है कि अगर स्थिति पर तुरंत नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले दिनों में उनका पूरी तरह बर्बाद हो जाना तय है। हंस पालकों ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। उनकी मांगें इस प्रकार हैं—
- बीमारी की वजह पता लगाने के लिए विशेषज्ञ मेडिकल टीम तुरंत सोनबिल भेजी जाए।
- मृत हंसों के नमूने की जांच कर बीमारी की पहचान जल्द की जाए।
- प्रभावित हंस पालकों को आर्थिक सहायता और उचित मुआवजा दिया जाए।
- टीके, दवाइयों और आवश्यक दवा सामग्री की आपूर्ति तुरंत सुनिश्चित की जाए।
- भविष्य में ऐसी महामारी रोकने के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान चलाए जाएँ।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस संकट पर लगाम नहीं लगी तो सोनबिल क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। मजबूर किसानों की एक ही पुकार है कि सरकार समय रहते ठोस कदम उठाए, वरना कई परिवार सड़क पर आने को मजबूर हो जाएंगे।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए हंस पालकों ने लोकप्रिय मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा शर्मा और पशुपालन मंत्री अतुल बरा से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है, ताकि इस संकट का समाधान जल्द से जल्द हो सके।



