दो दिवसीय नवसस्येष्टि यज्ञ एवं होली मिलन समारोह का भव्य शुभारम्भ

भारतीय संस्कृति दान देकर,बाँट कर खाने में विश्वास करती है-प्रमोद शास्त्री

होली एक प्राकृतिक पर्व है ऐतिहासिक नही-चन्द्र पाल शास्त्री

यज्ञ एवं योग मनुष्य जीवन के आवश्यक कर्तव्य के साथ मोक्ष प्राप्ति में सहायक-प्रवीण आर्य

ग़ाज़ियाबाद,शनिवार,28-02-2026 को आर्य समाज कवि नगर में दो दिवसीय वासन्तीय नवसस्येष्टि यज्ञ एवं होली मिलन समारोह का भव्य शुभारम्भ हुआ।

वैदिक विद्वान प्रमोद शास्त्री के ब्रह्मत्व में वासन्तीय नवसस्येष्टि यज्ञ से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।मुख्य यज्ञमान श्रीमती मृदुल अग्रवाल एवं विनोद प्रकाश अग्रवाल रहे।उन्होंने यज्ञ एवं होली के महत्व पर विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि होली मनाने का सही विधान,वसन्त ऋतु के नये अन्न को यज्ञ (हवन) में आहुति देकर ग्रहण करना है।क्योंकि भारतीय संस्कृति दान देकर,बाँट कर खाने में विश्वास करती है।उन्होंने जिला सभा के प्रधान स्व तेजपाल की आत्मिक शांति हेतू भी आहुतियां डलवाई और सदगति की प्रार्थना की।

सहारनपुर से पधारे सुप्रसिद्ध भजनोपदेशक अभिषेक आर्य, रविन्द्र आर्य के द्वारा गाये होली मिलन के गीतों को सुनकर श्रोता झूम उठे।

होली मिलन समारोह के मुख्य वक्ता आचार्य चन्द्र पाल शास्त्री का पीतवस्त्र ओढ़ाकर कर अभिनंदन किया गया।उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृत शिक्षा के अभाव में हमें वास्तविक तथ्यों का ज्ञान नहीं हो पाया।होली का यथार्थ तिनको की अग्नि में भूने हुए अधपके फली युक्त फसल को होलक (होला) कहते हैं।अर्थात् जिन पर छिलका होता है,जैसे हरे चने आदि।ऋतु के अनुसार,दो मुख्य प्रकार की फसलें होती हैं।1) खरीफ,2) रवि, रवि की फसल में आने वाले सभी प्रकार के अन्न को होला कहते है। वासन्तीय नवसस्येष्टि होलकोत्सव वसन्त ऋतु में आई हुई रवि की नवागत फसल को होम हवन मे डालकर फिर श्रद्धापूर्वक ग्रहण करने का नाम होली है।यह पर्व प्राकृतिक है ऐतिहासिक नही है और बाद में होला से ही होली बना है।उन्होंने होली पर्व पर बेस्ट बनने का संकल्प कराया।वेदों का स्वाध्याय कर एवं अपने जीवन को तदानुकूल बनाकर।

पतंजलि योग पीठ हरिद्वार से पधारे स्वामी विवेक देव ने कहा कि हमें दर्शन शास्त्रानुसार अपनी दिनचर्या बनानी होगी तभी जीवन खुशहाल बनेगा। वेदादि शास्त्रों का स्वाध्याय कर जीवन तदानुरूप बनायें तभी जीवन सफलीभुत होगा। पर्व हमें एक दूसरे से जोड़ते हैं, हमें एक रहना हैँ,संगठित रहना हैँ।

योगी प्रवीण आर्य ने कहा कि यज्ञ, योग,उपासना ईश्वर की प्राप्ति में अत्यन्त सहायक एवं उपयोगी कर्म वा साधन हैं।दोनों परस्पर पूरक हैं और जीवन के अत्यावश्यक कर्म वा कर्तव्य हैं।इन्हें करने से ही मनुष्य का जीवन सार्थक व सफल होता है।

इस अवसर पर मुख्य रूप से सर्वश्री राजेन्द्र आर्य,आलोक राघव,आशा रानी आर्या,डा प्रमोद सक्सेना, त्रिलोक शास्त्री,दीपक आर्य एवं गजराज चौधरी (उप-प्रधान) आदि उपस्थित रहे।

मंच का कुशल संचालन यशस्वी प्रधान वी के धामा ने किया।समाज के संरक्षक बृजपाल गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित किया।शांतिपाठ एवं ऋषि लंगर के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

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