नई दिल्ली। हलाल सर्टिफिकेशन को लेकर देश में जारी विवाद अब संसद तक पहुंच गया है। महाराष्ट्र की विधायक और बीजेपी नेत्री डॉ. मेधा कुलकर्णी ने संसद के शून्यकाल में “हलाल सर्टिफिकेशन और उससे जुड़ी समस्याएं” का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया और इसे संविधान, उपभोक्ता अधिकारों एवं बाज़ार की पारदर्शिता के विरुद्ध बताया।

कुलकर्णी ने कहा कि ‘हलाल’ शब्द मूल रूप से एक धार्मिक अवधारणा है, जो केवल मांसाहारी खाद्य पदार्थों पर लागू होती है, लेकिन आज यह दूध, चीनी, तेल, दवाइयाँ, कॉस्मेटिक्स, कंस्ट्रक्शन मटेरियल, स्टील, प्लास्टिक और मिनरल जैसे गैर-खाद्य उत्पादों पर भी लागू किया जा रहा है। उन्होंने इसे अनुचित और संदेहास्पद बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था भारत की धर्मनिरपेक्ष नीति के लिए चुनौती बन चुकी है।
उन्होंने कहा,
“भारत एक सेक्युलर देश है, यहाँ हर धर्म के लोगों की आस्था का सम्मान होना चाहिए। हिंदू और सिख धर्म में हलाल परंपरा मान्य नहीं है, ऐसे में सभी उपभोक्ताओं पर हलाल प्रमाणित उत्पाद थोपना सही नहीं है।”
निजी संस्थाओं पर उठाए सवाल
डॉ. मेधा कुलकर्णी ने आरोप लगाया कि Halal India Ltd., Halal Services India Pvt. Ltd., जमीयत उलेमा-ए-हिंद हलाल ट्रस्ट सहित कई निजी धार्मिक संस्थाएं हलाल प्रमाणन का व्यवसाय चला रही हैं और इसके नाम पर करोड़ों रुपये की वसूली हो रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि देश में 70 से ज्यादा फर्जी प्रमाणन संस्थाएं सक्रिय हैं, जिनमें से कुछ के खिलाफ यूपी में एफआईआर दर्ज की गई है।
सर्टिफिकेशन शुल्क पर भी सवाल
उन्होंने कहा कि हलाल सर्टिफिकेशन शुल्क की वजह से उत्पादों का मूल्य बढ़ रहा है और इसका बोझ हर उपभोक्ता पर अनिवार्य रूप से पड़ रहा है, जबकि भारत में खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी पहले से ही FSSAI और दवा प्रमाणन की जिम्मेदारी FDI जैसी सरकारी संस्थाओं के पास है।
संसद में रखी गई प्रमुख मांगें
डॉ. मेधा कुलकर्णी ने सरकार से निम्न मांगें रखीं—
✔ मांस उत्पादों के लिए यदि प्रमाणन जरूरी हो तो वह पूरी तरह सरकारी प्रणाली से हो।
✔ निजी व गैर-सरकारी संस्थाओं से तुरंत प्रमाणन अधिकार वापस लिए जाएँ।
✔ आवश्यकता पड़ने पर इस्लामिक विशेषज्ञ को सरकारी पैनल में नियुक्त किया जाए।
✔ सभी प्रमाणन शुल्क सरकार के खाते में जमा हों।
✔ फर्जी सर्टिफिकेट देने वाली संस्थाओं पर कार्रवाई हो।
✔ गैर-मांस एवं गैर-खाद्य उत्पादों से हलाल प्रमाणन हटाया जाए।
अब सरकार की प्रतिक्रिया पर नज़र
हलाल सर्टिफिकेशन पर उठे इस सवाल ने राजनीतिक और सामाजिक बहस को फिर तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
📌 यह मुद्दा अब राष्ट्रीय बहस में बदल चुका है और इसके दूरगामी राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
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