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अनूपपुर। हरद गांव की हवा में घुल रहा ‘धीमा जहर’


मोजर बेयर व औद्योगिक इकाइयों की राख से बढ़ा प्रदूषण, सांस लेना हुआ मुश्किल
बच्चों-बुजुर्गों की सेहत पर सीधा असर

समाज जागरण | अनूपपुर। जिले के जैतहरी क्षेत्र में स्थित मोजर बेयर (हिंदुस्तान पावर) सहित आसपास की औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाली राख अब ग्राम पंचायत हरद और आसपास के इलाकों के लिए गंभीर संकट बनती जा रही है। खुले में उड़ती राख ने अनूपपुर, कोतमा और पसान क्षेत्र की हवा को प्रदूषित कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि लोगों के लिए खुले में सांस लेना भी मुश्किल होता जा रहा है।

सफेद राख, काला भविष्य
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार महीन राख घरों की छतों, खेतों और सड़कों पर परत के रूप में जम रही है। हवा के साथ यह राख सीधे फेफड़ों में पहुंच रही है। परिणामस्वरूप बच्चों में लगातार खांसी-जुकाम, आंखों में जलन और सांस संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं, जबकि बुजुर्गों तथा दमा-एलर्जी से पीड़ित मरीजों की परेशानी कई गुना हो गई है।

नियमों की अनदेखी का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि उद्योग प्रबंधन द्वारा राख का सुरक्षित और वैज्ञानिक निस्तारण नहीं किया जा रहा। खुले डंपिंग यार्ड, पर्याप्त पानी छिड़काव और ढकाव (कवरिंग) की व्यवस्था के अभाव में राख उड़कर आबादी तक पहुंच रही है। पर्यावरणीय मानकों के पालन को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं, जिसे केवल कागजी औपचारिकता बताया जा रहा है।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभाग और स्थानीय प्रशासन इस गंभीर समस्या पर मौन क्यों हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है।

विकास चाहिए, विनाश नहीं
स्थानीय नागरिकों ने स्पष्ट किया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन स्वास्थ्य और पर्यावरण की कीमत पर विकास स्वीकार्य नहीं। उन्होंने प्रशासन और कंपनी प्रबंधन से राख के सुरक्षित निस्तारण, प्रदूषण नियंत्रण उपायों की सख्त निगरानी, नियमित पानी छिड़काव, डंपिंग यार्ड की कवरिंग तथा प्रभावित लोगों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच की मांग की है। सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार विभाग समय रहते जागेंगे, या ग्राम पंचायत हरद और आसपास का इलाका यूं ही ‘धीमे जहर’ की चपेट में बना रहेगा?


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