हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, कोयलांचल में भक्ति-उल्लास का अद्भुत संगम
समाज जागरण | जितेंद्र शर्मा | अमलाई। नूतन वर्ष 2026 के प्रथम दिवस पर कोयला अंचल के सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थलों—एकादशमुखी संकट मोचन हनुमान मंदिर, जगत जननी मातेश्वरी मां भवतारिणी तथा सिद्ध बाबा धाम—में आस्था का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा। वर्ष 2025 को विदाई और 2026 के स्वागत में श्रद्धालुओं ने भक्ति, उल्लास और श्रद्धा के साथ नववर्ष का उत्सव मनाया।
नए वर्ष के पहले ही दिन ऐसा दृश्य उपस्थित हुआ मानो पावन स्थलों पर विशाल मेला लगा हो। पवई क्षेत्र ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों से भी हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालु सपरिवार प्रातःकाल से ही मंदिरों की ओर निकल पड़े। एकादशमुखी संकट मोचन हनुमान मंदिर में लंबी कतारें लगी रहीं, वहीं प्राचीन सिद्ध बाबा धाम में भी दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहला नववर्ष, ऐतिहासिक भीड़
उल्लेखनीय है कि एकादशमुखी संकट मोचन हनुमान मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा अप्रैल 2025 में संपन्न हुई थी। प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह पहला नववर्ष था, जिसमें मंदिर में ऐतिहासिक भीड़ देखने को मिली। अमलाई नगर के चचाई रोड, बरगामा रोड, संजय नगर रोड और अमलाई-शहडोल रोड सहित सभी प्रमुख मार्ग श्रद्धालुओं से भरे नजर आए।
प्राकृतिक स्थलों पर भी उत्सव का माहौल
नववर्ष के अवसर पर नगर एवं आसपास के प्राकृतिक और मनोरम स्थलों पर भी लोगों की भारी भीड़ रही। श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने प्रकृति के सानिध्य में पिकनिक मनाई और नए वर्ष का उत्सव पूरे उत्साह के साथ मनाया। नगर के सभी प्रमुख मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान, विशेष पूजन और भजन-कीर्तन आयोजित किए गए।
सेवा और श्रद्धा का संगम
नववर्ष पर सेवा भाव की अनूठी मिसाल देखने को मिली। विभिन्न संगठनों और मंदिर समितियों द्वारा हजारों श्रद्धालुओं को खिचड़ी प्रसाद का वितरण किया गया। श्रद्धालुओं ने प्रभु के दरबार में माथा टेककर नए वर्ष में सुख, समृद्धि, शांति और मंगल की कामना की।
नववर्ष 2026 के पहले ही दिन कोयलांचल की धार्मिक आस्था, अनुशासन और सामूहिक श्रद्धा ने पूरे प्रदेश में एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया, जो लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।




