पंचकूला। हरियाणा आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार और एएसआई संदीप की मौत के मामलों पर हरियाणा पुलिस महानिदेशक (DGP) ओपी सिंह ने कहा कि आज के समय में दो दुनियाएँ हैं — एक सोशल मीडिया की और दूसरी वास्तविक दुनिया की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “वास्तविक दुनिया में कोई समस्या नहीं है, जो कुछ हो रहा था वह सिर्फ सोशल मीडिया पर चल रहा था।”

प्रेस वार्ता मे डीजीपी सिंह ने कहा कि वे बेहद दुखी हैं कि पुलिस विभाग ने अपने दो साथियों को खो दिया है, जो बीते 20-25 वर्षों से सेवा में थे और जनता की सेवा कर रहे थे। उन्होंने कहा, “हम पुलिस बल हैं, हमारी लड़ाई जारी है। क्या हमारे पास यह विकल्प है कि हम बैठ जाएं और हतोत्साहित हो जाएं? बिल्कुल नहीं। किसी का मनोबल नहीं टूटा, कुछ नहीं हुआ।”
सोशल मीडिया पर फैल रही चर्चाओं पर टिप्पणी करते हुए डीजीपी ने कहा कि “सोशल मीडिया की अपनी एक दुनिया है, जहां लोग डर फैलाते हैं। जितना आप देखते हैं, उतनी उनकी व्यूअरशिप बढ़ती है, और उतना ही लाभ अमेरिका को होता है।”
डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि पुलिस बल एकजुट है और अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करता रहेगा।
समाज जागरण टिप्पणी:
जाहिर सी बात है कि आज सोशल मीडिया बेलगाम हो चुका है। जहाँ एक आम इन्फ्लूएंसर अफवाह फैलाकर अधिक पैसा कमाना चाहता है, वहीं राजनीतिक पार्टियाँ भी जनता को भ्रमित करने के लिए इसका भरपूर उपयोग कर रही हैं।
बरेली की हालिया घटना इसका उदाहरण है — जहाँ एक व्यक्ति की हत्या ग्रामीणों ने उसे चोर समझकर कर दी। लेकिन राजनीतिक दलों ने तुरंत उसमें जातिवाद का कोण खोज लिया। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक ने अपने बयानों के माध्यम से इस घटना को जातिगत रंग देने की कोशिश की।
कहीं न कहीं, सरकार और न्यायपालिका भी इस स्थिति के लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं। इस तरह की झूठी खबरों पर न तो सरकार कोई ठोस कार्रवाई करती है, और न ही न्यायपालिका स्वतः संज्ञान लेती है। ऐसा प्रतीत होता है मानो इन दोनों संस्थाओं को किसी बड़े जातीय दंगे का इंतजार हो — ताकि वोट बैंक की राजनीति को और मजबूत किया जा सके।
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