हिंदी भाषा आत्म गौरव तथा वैश्विकी भाषा का प्रतीक


नई दिल्ली/15सितम्बर/पंजाबी बाग बेस्ट स्थित धन्वंतरी भवन के सभागार में राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ द्वारा राष्ट्रभाषा हिंदी के पखवाड़ा समापन में राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के शासी निकाय के अध्यक्ष पद्मविभूषित वैद्य देवेंद्र त्रिगुणा ने अपने संदेश में राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ की निदेशक वैद्य वन्दना सिरोहा को हिंदी में अधिकाधिक 98 प्रतिशत पत्राचार करने पर राजभाषा विभाग गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा प्रशंशा करने पर बधाई दी। समारोह में राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ की निदेशक वैद्य वंदना सिरोहा ने कहा कि हिंदी दिवस का उद्देश्य हिंदी भाषा को आधिकारिक रूप से अपने दैनिक कार्यों में हिंदी लेखन हिंदी टंकण, हिंदी बाद विवाद प्रतियोगिता  तथा हिंदी की व्याख्या,एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से अधिकाधिक प्रचार प्रसार करना है।

हिंदी हमारे आत्म सम्मान एवं गौरव का प्रतीक है। हिंदी के उत्तम लेखन, कविता  तथा भाषण आदि में प्रथम, द्वितीय, एवं तृतीय पुरस्कार नकद धनराशि के साथ सांत्वना एवं प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।


उक्त अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप मे विद्यापीठ के वरिष्ठ गुरु वैद्य ताराचंद्र शर्मा, वैद्य प्रीति छाबड़ा, आयुर्वेद महासम्मेलन के सचिव वैद्य अवधेश श्रीवास्तव  ने हिन्दी की महत्ता पर विस्तृत प्रकाश डाला।


वैद्य अच्युत कुमार त्रिपाठी ने हिंदी को राष्ट्र भाषा हिंदी बनाए जाने के सम्बन्ध में कहा कि असहयोग आंदोलन की जन संदेश एवं प्रवाह की भाषा हिंदी थी। जिसके प्रचार प्रसार में गृह मंत्रालय भारत सरकार के राज भाषा विभागकी भूमिका महत्वपूर्ण है।
उक्त कार्यक्रम में  राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ आयुष् मंत्रालय भारत सरकार एवं अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के सदस्य एवं पदाधिकारी की उपस्थित उल्लेखनीय रही।

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