तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ फार्मेसी में स्ट्रेस मैनेजमेंट पर गेस्ट लेक्चर में मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के प्रिंसिपल प्रो. एनके सिंह और कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की एचओडी प्रो. साधना सिंह ने स्टुडेंट्स को दिए तनाव से उबरने के टिप्स
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के प्रिंसिपल प्रो. एनके सिंह ने कहा, यूं तो स्ट्रेस अच्छा होता है। यह मोटिवेट करता है। उत्साहित करता है, जबकि डिस्ट्रेस सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। डिस्ट्रेस चिंता पैदा करता है। क्रोध लाता है। तनाव में बायोकेमिकल रिएक्शंस होती है। शरीर में और कई तरह के हार्माेन और न्यूरोट्रांसमीटर में बदलाव होता है। उन्होंने बताया, तनाव के स्रोत क्या-क्या हैं? सामाजिक तनाव, जैविक तनाव, पर्यावरणीय तनाव आदि पर बोलते हुए प्रो. सिंह ने कहा, एंटीबायोटिक से रेजिस्टेंस बनने के कारण एक समय बाद एंटीबायोटिक भी असर हो जाएंगे। सिंपैथेटिक सिस्टम और पैरासिंपैथेटिक सिस्टम शरीर में दिन के साथ महत्वपूर्ण बदलाव लाते हैं। तनाव प्रबंधन में इनका बहुत बड़ा योगदान होता है। प्रो. सिंह तीर्थंकर महावीर कॉलेज ऑफ फार्मेसी की ओर से स्ट्रेस मैनेजमेंट पर हुए गेस्ट लेक्चर में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इससे पूर्व मुख्य अतिथि प्रो. एनके सिंह, डिपार्टमेंट ऑफ़ कम्युनिटी मेडिसिन की एचओडी प्रो. साधना सिंह, फार्मेसी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आशु मित्तल, वाइस प्रिंसिपल प्रो. मयूर पोरवाल आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इस मौके पर सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
प्रो. सिंह ने झूले का उदाहरण देते हुए कहा, झूलने के दौरान तनाव प्रबंधन और तनाव का एक्सप्रेशन विभिन्न रूपों में होता है। तनाव के कारण जीन में आए बदलाव के अध्ययन को हैप्पी जेनेटिक चेंज कहते हैं, जब मनुष्य के बच्चे का विकास होता है तो सबसे पहले दिल आता है फिर दिमाग आता है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 70,000 विचार मनुष्य को आते हैं। न्यूरोप्लास्टिसिटी एक बहुत महत्वपूर्ण शब्द है, जिस पर ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने बताया, ज्ञान की क्रिया से जो डीएनए और क्रोमोसोम के निर्माण में लगने वाले टीलोमर्स होते हैं, उनकी लंबाई बढ़ जाती है, अर्थात ध्यान हमारे शरीर को स्वस्थ करता है और ऊर्जावित्त करता है। दूसरी ओर एचओडी प्रो. साधना सिंह ने स्टुडेंट्स और फैकल्टीज़ को ध्यान और तनाव मुक्त रहने की विभिन्न विधि- सांसों पर ध्यान केंद्रित करना, डीप ब्रीदिंग करने की प्रैक्टिस कराई। इससे तनाव को कम करने और ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली। स्ट्रेस मैनेजमेंट कार्यक्रम में डॉ. फूलचंद, डॉ. आशीष सिंघई, डॉ. आदित्य विक्रम जैन, श्रीमती प्रीति यादव, श्री अपूर्व रस्तोगी आदि के संग-संग डी फार्म, बीफार्म, एमफार्म, फार्म डी के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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