सौरभ कुमार,दैनिक समाज जागरण,संवाददाता,झारखंड
जमशेदपुर (जादूगोड़ा) 19 सितंबर 2025:–जादूगोड़ा में सड़क के किनारे बंदरों का दिखना अब आम बात बन गया है। बता दे कि बीते एक साल से बंदर हर क्षेत्र पर दिख रहे हैं। कारण अब जंगल में खाने को कुछ बचा नहीं। बंदर अपने प्राकृतिक भोजन पर जीवित रहने के लिए स्वाभाविक रूप से विकसित हुए हैं और जंगल पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मगर दुर्भाग्य की बात यह है कि जिस तेजी से जंगल कट रहा है तो रहेंगे कहां? यूसीआईएल कंपनी के द्वारा चलाया हुआ मिल कैंटीन इन बंदरों को समय-समय पर भोजन उपलब्ध कराता था। कंपनी कैंटीन के वेस्टेज से भी इनका भरण पोषण होता था। कंपनी के कई कैंटीन बंद होने के कारण भी इन पर असर पड़ा है। पहले कंपनी के वेस्टेज खाकर यह वही रह जाते थे लेकिन अब भोजन नहीं मिल रहा है तो यह शहर की ओर आ रहे हैं। भोजन देना उनके प्राकृतिक व्यवहार को बाधित करता है और उन्हें मानव क्षेत्रों के पास आने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे संघर्ष बढ़ सकता है। अब यह बेचारे बंदर जाए तो कहां जाए खाएं तो क्या खाएं? जंगल उनके लिए प्राकृतिक भोजन का एक समृद्ध स्रोत है, जिसमें फल, पत्ते, फूल, बीज, मेवे, और कीड़े-मकोड़े शामिल हैं। वे सर्वाहारी होते हैं और अपने प्राकृतिक आवासों में भोजन की तलाश करते हैं, जो संतुलन बनाए रखने और अपने प्राकृतिक जीवन को जीने के लिए आवश्यक है। मगर इंसानों ने जिस तेजी से जंगल को काटा है, उन्हें घर से बेघर कर दिया है। यही कारण है कि जादूगोड़ा क्षेत्र पर रोड के किनारे सड़क के किनारे अब बंदर दिखाई देने लगे हैं क्योंकि बचा ही नहीं। बंदर स्तनधारियों का एक बहुत ही विविध और दिलचस्प समूह हैं। इनका पूर्वज मनुष्यों और वानरों दोनों से एक ही है। दुनिया भर में बंदरों की कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें अलग-अलग रंग और आकार होने के कारण अनोखे गुण होते हैं, लेकिन व्यापक रूप से देखा जाए तो ये बहुत ही सामाजिक, बुद्धिमान और चतुर होते हैं। वर्तमान समय में इन बंदरों के हालात पर स्थानीय वन विभाग या संबंधित पशु बचाव संगठनों को उनके बारे में कुछ सोचना चाहिए। कुछ ठोस कदम उठाने चाहिए। प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता के बजाय मानवीय भोजन खिलाने से बंदरों की आदत खराब हो सकती है और यह उनकी सेहत के लिए भी ठीक नहीं होता। वन विभाग और अन्य एजेंसियां बंदरों के बचाव और उनके भोजन की व्यवस्था करने के लिए जिम्मेदार होती हैं, इसलिए उनका सहयोग करें। बंदरों के लिए प्राकृतिक भोजन और आवास को बचाना महत्वपूर्ण है ताकि वे भूखे न मरें। वनों की कटाई, शिकार, अवैध व्यापार और लकड़ी की निकासी के कारण विश्व भर में जीव-जंतुओं की संख्या में कमी आ रही है। अगर कोई बंदर को पकड़ कर रखता है तो, यह एक गैरकानूनी और क्रूर काम है, और आपको तुरंत स्थानीय प्रशासन जैसे वन विभाग या नगर निगम को सूचित करना चाहिए, बंदरों को घर में पालना एक गंभीर अपराध है. ऐसा करने पर सज़ा हो सकती है. वाइल्ड लाइफ़ एक्ट 1972 की धारा 51 के मुताबिक, किसी जानवर की जिंदगी से मनोरंजन के लिए खिलवाड़ नहीं किया जा सकता.
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