कटनी जिला इन दिनों अवैध रेत उत्खनन और ओवरलोड परिवहन का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। नदियों के घाटों से रात के अंधेरे में रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है, जबकि दिन में ओवरलोड रेत से भरे डंपर और ट्रक बिना रोक-टोक सड़कों पर दौड़ते नजर आ रहे हैं। स्थिति यह है कि प्रशासन द्वारा की जाने वाली कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई है।
जानकारों के अनुसार कटनी जिले की प्रमुख नदियों और आसपास के रेत घाटों पर नियमों को ताक पर रखकर भारी मशीनों से उत्खनन कराया जा रहा है। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि खनन सीमित दायरे और तय मात्रा में ही किया जाना चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। कई स्थानों पर तो नदी के बीच तक जेसीबी और पोकलेन मशीनें पहुंचाई जा रही हैं, जिससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है और पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
अवैध उत्खनन के साथ-साथ ओवरलोड रेत परिवहन भी बड़ी समस्या बन चुका है। ग्रामीण और शहरी मार्गों पर क्षमता से कहीं अधिक रेत लादकर वाहन चलाए जा रहे हैं। इससे जहां सड़कें कम समय में जर्जर हो रही हैं, वहीं आम लोगों की जान भी खतरे में पड़ गई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रात के समय तेज रफ्तार ओवरलोड ट्रकों की आवाजाही के कारण हादसों का डर बना रहता है, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
सूत्रों का आरोप है कि रेत माफिया के नेटवर्क के आगे संबंधित विभाग असहाय नजर आ रहे हैं। खनिज विभाग, परिवहन विभाग और पुलिस के बीच समन्वय की कमी के कारण अवैध कारोबार निर्बाध रूप से फल-फूल रहा है। कभी-कभार दिखावटी कार्रवाई जरूर होती है, लेकिन उसमें भी छोटे चालकों पर जुर्माना लगाकर बड़े लोगों को छोड़ दिया जाता है।
इस अवैध कारोबार का सीधा असर शासन के राजस्व पर भी पड़ रहा है। सरकार को मिलने वाला करोड़ों रुपये का राजस्व चोरी के रास्ते माफियाओं की जेब में जा रहा है। वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों को महंगी रेत खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है, क्योंकि वैध आपूर्ति व्यवस्था ठीक से संचालित नहीं हो रही।
पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि समय रहते अवैध रेत उत्खनन नहीं रोका गया, तो इसका असर आने वाले वर्षों में और भी गंभीर दिखाई देगा। नदी की धाराएं बदलने, भूजल स्तर गिरने और आसपास के गांवों में कटाव जैसी समस्याएं बढ़ेंगी। इसके बावजूद प्रशासनिक सख्ती का अभाव समझ से परे है।
कटनी जिले के नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अवैध रेत उत्खनन और ओवरलोड परिवहन के खिलाफ स्थायी और प्रभावी कार्रवाई की जाए। सिर्फ छापामार कार्रवाई नहीं, बल्कि दोषी अधिकारियों और माफियाओं पर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए, ताकि कानून का भय स्थापित हो सके। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस गंभीर समस्या पर ठोस कदम उठाएगा या फिर कटनी जिला रेत माफियाओं की गिरफ्त में यूं ही फंसा रहेगा।



