नोएडा समाज जागरण डेस्क
नोएडा ऐसे तो स्मार्ट सिटी के साथ-साथ भ्रष्टाचार सिटी के नाम से भी ख्याति प्राप्त है। यही कारण है कि शहर के जितने भी निजाम हुए सभी बेलगाम हुए। प्राधिकरण के झरोखे से दिखने वाली सेक्टर भले ही स्वच्छ भारत अभियान से अछूता रह जाय, सेक्टर 2,5,6,8,9 और 10 भले ही अतिक्रमण के तले दबा हो लेकिन निजाम साहब फरमाते है सब ठीक ठाक है। शहर मे बड़े बड़े स्पोर्टस कम्पलेक्स हो अच्छी बात है लेकिन इसके बदले मे जो शहर की पहचान है आधार है उसका अनदेखी तो नही होनी चाहिए।
नोएडा के विभिन्न औद्योगिक सेक्टरों मे जहाँ एक तरफ ठेली पटरी, झुग्गी झोपड़ी का कब्जा है वही दूसरी तरफ औद्योगिक उपयोग के लिए सस्ते दर पर आवंटित भूमि का उपयोग व्यवसायिक रूप से किया जा रहा है। जहाँ एक तरफ नोएडा प्राधिकरण इस अवैध गतिविधियों को रोकने मे असफल रहा है वही दूसरी तरफ औधोगिक गतिविधियों के लिए लगातार भूमि आवंटन के नये नये स्कीम लाकर गुमराह करने मे सफल रहा है।
नोएडा शहर के वरिष्ठ नागरिक व अधिवक्ता श्री अनिल के गर्ग के द्वारा किए गए टवीट और लिखे गए पत्र से इस संबंध मे बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। श्री गर्ग ने कहा है कि जब एक तरफ औद्योगिक भूमि का उपयोग व्यवसायिक तरीके से किया जा रहा है वही दूसरी तरफ नोएडा प्राधिकरण और सरकारें महंगी दरो पर उद्योग को भूमि आवंटन करने की बात कर रही है। लाख-दो लाख रुपये प्रति वर्ग/फीट के दर से जो उद्योंग इस भूमि को खरीदेगी तो क्या इसमे भांग और अफीम बनाने का काम करेगी।
श्री गर्ग ने आगे कहा है कि नोएडा मे कई सेक्टर ऐसे है जो औद्योगिक है उनकों कमर्शियल मे बदला जा सकता है लेकिन सुस्त और भ्रष्टाचार मे लिप्त यहाँ के नौकरशाही और अफशरशाही ने कभी ध्यान ही नही दिया। औद्योगिक भूखंडो का उपयोग कार्यालय तथा दुकानों के लिए किया जा रहा है और उनको सस्ती बिजली पानी उद्योग के स्कीम के तहत दिए जा रहे है। यही कारण है कि उद्योग को सस्ते जमीन मिलने के बजाय उनको महंगे लेने पड़ रहे है।
दूसरा मामला हमारे जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) की लापरवाही है, जिसने लघु उद्योग (एसएसआई) पंजीकरण भी एमएसएमई ने जारी किया है। प्राधिकरण एसएसआई पंजीकरण लेने के बाद इन उद्योगों को कार्यात्मक प्रमाणपत्र जारी करता है, लेकिन औद्योगिक भूखंडों के सभी आवंटियों की गतिविधियों की सतर्कता/निगरानी नहीं करता है। यह पिछले 25-30 वर्षों से निहित स्वार्थ के लिए एक बड़ा सांठगांठ और भ्रष्टाचार का खेला गया है। इन औद्योगिक इकाइयों को अधिकतम कार्यात्मक प्रमाणपत्र जारी करना एक बड़ा खेल है।
सवाल उठता है कि कार्रवाई कौन करेगा? इन सभी अनियमितताओं, भ्रष्टाचार, प्राधिकरण के अधिकारियों की लापरवाही के कारण औद्योगिक भूखंडों की दरें वाणिज्यिक की तरह उपयोग के रूप में बढ़ा दी गई हैं। जबकि नोएडा की पहचान एक औद्योगिक शहर के रूप मे हुई है।
हाल ही मे नोएडा प्राधिकरण ने अपने सभी वर्क सर्किल को पत्र लिखकर निर्देशित किया है कि प्रत्येक वर्क सर्किल क्षेत्र में आने वाले समस्त औद्योगिक भूखण्डों का भौतिक निरीक्षण कराते हुये भूखण्डों पर संचालित परियोजनाओं का स्पष्ट उल्लेख करते हुये फोटोग्राफ सहित आख्या एक सप्ताह के अन्दर अधोहस्ताक्षरी को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें । हालांकि इस प्रकार के निर्देश पहली बार दिया गया हो ऐसा नही है इससे पहले भी कई बार दिया जा चुका है। इस बार इस पर कितना कार्यवाही होगा यह तो आने वाले समय मे ही पता चलेगा।
नोएडा में स्थापित औद्योगिक क्षेत्र को तीन फेज यथा फेज-01, फेज- 02 एवं फेज-03 में विभाजित किया गया है जिसके अन्तर्गत औद्योगिक विभाग के रिकार्ड के सुनसार क्रमशः फेज-1 में लगभग 4818 भूखण्ड फेज-2 में लगभग 2115 भूखण्ड तथा फेज-3 में लगभग 4199 भूखण्ड आवंटित है। इन औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित औद्योगिक भूखण्डों के सम्बन्ध में संज्ञानित हुआ है कि कुछ औद्योगिक भूखण्डों में जिन परियोजनाओं के संचालन की अनुमति प्रदान की गई है उन परियोजनाओं के इतर अन्य परियोजनाओं अथवा वाणिज्यिक गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। आवंटियों द्वारा अनुमन्य परियोजनाओं के इतर वाणिज्यिक गतिविधि का संचालन किया जाना आवंटन एवं पट्टा प्रलेख की नियम एवं शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन है।