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एमजीएम अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन तेज

दैनिक समाज जागरण 06.04.2026 चांद कुमार लायेक (ब्यूरो चीफ) पूर्वी सिंहभूम जमशेदपुर

जमशेदपुर: शहर के प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य संस्थान एमजीएम अस्पताल जमशेदपुर में जूनियर डॉक्टरों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस हड़ताल के चलते अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


सोमवार से शुरू हुई इस हड़ताल में बड़ी संख्या में जूनियर डॉक्टर अस्पताल परिसर के बाहर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वे पिछले पांच वर्षों से लगातार स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। कई बार संबंधित अधिकारियों द्वारा आश्वासन दिया गया, लेकिन हर बार ये आश्वासन कागजों तक ही सीमित रह गए।


प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक उनकी स्टाइपेंड वृद्धि की मांग पूरी नहीं होती, तब तक वे हड़ताल समाप्त नहीं करेंगे। उनका आरोप है कि सरकार उनकी मेहनत और सेवा के प्रति संवेदनशील नहीं है, जबकि वे दिन-रात मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं।


हड़ताल का सबसे ज्यादा असर अस्पताल की ओपीडी और सामान्य सेवाओं पर देखने को मिल रहा है। कई विभागों में कामकाज ठप हो गया है और मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। हालांकि, जूनियर डॉक्टरों ने यह स्पष्ट किया है कि इमरजेंसी सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। गंभीर मरीजों का इलाज जारी है, लेकिन सीमित संसाधनों और स्टाफ के कारण वहां भी दबाव बढ़ गया है।


डॉक्टरों का कहना है कि वे 24 घंटे सेवा देते हैं, कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं और फिर भी उन्हें उचित स्टाइपेंड नहीं मिलता। उनका मानना है कि वर्तमान स्टाइपेंड महंगाई और बढ़ती जरूरतों के हिसाब से बेहद कम है, जिससे उनका गुजारा करना मुश्किल हो रहा है।


इस बीच, जूनियर डॉक्टरों ने दावा किया है कि मेडिकल कॉलेज के अन्य स्टाफ और अस्पताल के सीनियर डॉक्टर भी उनके समर्थन में हैं। इससे आंदोलन को और मजबूती मिल रही है। डॉक्टरों ने यह भी संकेत दिया है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन और तेज किया जा सकता है।


अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, मामले को लेकर उच्च स्तर पर चर्चा जारी है और समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।


इधर, मरीजों और उनके परिजनों में इस हड़ताल को लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है। उनका कहना है कि डॉक्टरों और सरकार के बीच चल रहे विवाद का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। कई मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।


कुल मिलाकर, स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुई यह हड़ताल अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेती नजर आ रही है। यदि जल्द ही इस पर कोई समाधान नहीं निकाला गया, तो शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर इसका और भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।


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