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कालांवाली में आवारा पशुओं का आतंक! 67 वर्षीय बुजुर्ग पर हमला, चेहरे पर लगे टांके; बुजुर्ग महिला की जांघ की हड्डी भी टूटी

लगातार हो रहे हमलों से दहशत में शहरवासी, बुजुर्गों और बच्चों का घर से निकलना हुआ मुश्किल; आवारा पशुओं को गौशालाओं में भेजने की मांग

दैनिक समाज जागरण | सुरेश जोरासिया

कालांवाली। शहर और आसपास के क्षेत्रों में आवारा पशुओं का आतंक लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। सड़कों और गलियों में खुलेआम घूम रहे आवारा मवेशियों के हमलों से राहगीर और स्थानीय निवासी परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि अब बुजुर्गों और बच्चों का घर से बाहर निकलना भी जोखिम भरा होता जा रहा है। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

ताजा मामला शहर के पुरानी मंडी क्षेत्र की चौड़ी गली, पुराने पोस्ट ऑफिस के नजदीक का है। यहां गुरुद्वारा बस्ती निवासी 67 वर्षीय सुरजीत सिंह पुत्र प्यारा सिंह पर एक आवारा पशु ने अचानक हमला कर दिया। पशु की जोरदार टक्कर से वह सड़क पर गिर पड़े और उनके घुटने, हाथ तथा चेहरे पर चोटें आईं। चोट इतनी गंभीर थी कि आंख के ऊपरी हिस्से के पास डॉक्टरों को टांके लगाने पड़े। फिलहाल उनका प्राथमिक उपचार किया गया है।

कुछ दिन पहले बुजुर्ग महिला की टूटी थी जांघ की हड्डी

आवारा पशुओं के हमले की यह कोई पहली घटना नहीं है। कुछ दिन पहले अनाज मंडी में दुकान नंबर 36 के पीछे भी इसी तरह की घटना सामने आई थी। यहां दाने भूनने का काम करने वाली 68 वर्षीय बुजुर्ग महिला को एक आवारा पशु ने जोरदार टक्कर मार दी थी। हादसे में महिला की जांघ की हड्डी टूट गई। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए अस्पताल में उपचार जारी है और वह अभी भी बिस्तर से उठने में असमर्थ हैं।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

लगातार सामने आ रही घटनाओं से स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश का माहौल है। निवासियों का कहना है कि सड़कों और गलियों में आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है, लेकिन नगर पालिका और प्रशासन की ओर से समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन और नगर पालिका से मांग की है कि आवारा पशुओं को जल्द पकड़कर सुरक्षित रूप से गौशालाओं में पहुंचाया जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। अब शहरवासियों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।


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