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कोतमा: रिहायशी क्षेत्र में इंडेन गैस एजेंसी का गोदाम, प्रशासन की घोर लापरवाही से त्रासदी की दस्तक

जितेंद्र शर्मा

जमुना कोतमा के रिहायशी इलाके में स्थित अकरम इंडेन गैस एजेंसी का गोदाम प्रशासनिक लापरवाही और अयोग्यता का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। गैस सिलेंडरों का भंडारण और पास के अंडरग्राउंड खदानों में विस्फोटक सामग्री का उपयोग पूरे क्षेत्र को एक बड़े हादसे की ओर धकेल रहा है। यह स्थिति प्रशासन की नाकामी और जनता की सुरक्षा के प्रति उनकी घोर असंवेदनशीलता को दर्शाती है

अधिकारियों की आपराधिक चुप्पी: जनता की जिंदगी दांव पर
स्थानीय निवासियों ने बार-बार इस खतरे को लेकर शिकायत की, लेकिन अधिकारियों ने केवल आश्वासन देकर मामले को टाल दिया। उनकी निष्क्रियता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनता की सुरक्षा उनके लिए प्राथमिकता नहीं है। यह चुप्पी किसी अनजाने कारण की नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई अनदेखी है। क्या प्रशासन को एक और मुरैना जैसी त्रासदी का इंतजार है?

हरदा और मुरैना हादसों से भी नहीं सीखा प्रशासन
मध्य प्रदेश के हरदा जिले में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट और मुरैना में विस्फोटक सामग्री के कारण हुए हादसे प्रशासन के लिए चेतावनी थे। इन घटनाओं में दर्जनों लोगों की जान गई और सैकड़ों परिवार तबाह हो गए। फिर भी कोतमा में अधिकारियों ने वही गलती दोहराने की ठान ली है। उनकी लापरवाही बताती है कि वे किसी भी स्थिति को गंभीरता से लेने के लिए तैयार नहीं हैं

रिहायशी क्षेत्र में गैस

गोदाम:टिक-टिक करता टाइम बम
गैस सिलेंडरों और विस्फोटक सामग्री का इतना पास होना पूरे क्षेत्र को एकटिक-टिक करता टाइम बम रहा है। स्थानीय लोगों का हर दिन भय के साए में गुजरता है। एक छोटी-सी चूक या दुर्घटना सैकड़ों परिवारों को तबाह कर सकती है। क्या अधिकारियों को इन लोगों की जिंदगी की कोई परवाह नहीं है?

अधिकारियों का अक्षम नेतृत्व उजागर
प्रशासन की यह निष्क्रियता केवल उनकी असंवेदनशीलता नहीं, बल्कि उनकी अयोग्यता का भी प्रमाण है। जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, वे अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह भागते नजर आ रहे हैं। यह रवैया न केवल उनकी अक्षमता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि वे अपने पद पर बने रहने के लायक नहीं हैं

जनता का आक्रोश: अब और बर्दाश्त नहीं

स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि अगर गैस गोदाम को तुरंत रिहायशी इलाके से हटाया नहीं गया और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। जनता ने साफ कर दिया है कि किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी सीधे प्रशासन और अधिकारियों पर होगी

प्रशासन पर सीधा सवाल: क्या वे जनता की जान की कीमत पर बैठे रहेंगे?

अब समय आ गया है कि अधिकारी जागें और अपनी जिम्मेदारी निभाएं। यदि अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता का गुस्सा अधिकारियों की निष्क्रियता और अयोग्यता को उजागर कर देगा। कोतमा के लोग अपनी सुरक्षा के लिए लड़ने को तैयार हैं, और प्रशासन की यह लापरवाही अब और सहन नहीं की जाएगी


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