चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में व्याख्यानमाला का आयोजन

आर॰एस॰एस॰ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने किया कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को संबोधित

दैनिक समाज जागरण, ( महेन्द्र जावला बहल )

भिवानी 09 दिसंबर। चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में विद्या भारती, उच्चतर शिक्षा विभाग एवं सी॰ बी॰ एल॰ यू॰ के संयुक्त तत्त्वावधान में पंचकोषीय एवं शिक्षा भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित विषय पर एक वर्षीय व्याख्यान माला के प्रथम व्याख्यान का आयोजन विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो॰ दीप्ति धर्माणी की अध्यक्षता में किया गया। व्याख्यान माला कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक श्री इंद्रेश कुमार, बतौर मुख्य अतिथि विद्या भारती के उत्तर क्षेत्र सह संगठन मंत्री श्री बालकिशन एवं बतौर विशिष्ट अतिथि समग्र शिक्षा विभाग चंडीगढ़ के अध्यक्ष श्री सौरभ चैधरी ने शिरकत की।
विश्वविद्यालय में कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए आर॰ एस॰ एस॰ के वरिष्ठ प्रचारक श्री इंद्रेश कुमार ने कहा कि शिक्षा का प्रमुख उद्वेश्य व्यक्ति निर्माण है और शिक्षा का दूसरा नाम मानवता है। विद्या बेहतर इंसान बनाती है। अविद्या से विकार, विवाद और हिंसा उत्पन्न होते हैं इसलिए विद्या का संस्कारी एवं गुणवत्तापूर्ण होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में मानवता एवं राष्ट्रीयता का भाव होना चाहिए। पंचकोषीय शिक्षा से व्यक्ति का समग्र विकास संभव है। युवा शरीर से सशक्त हो, प्राण से ऊर्जावान हो, मन से संतुलित एवं संकल्पित हो और विद्या एवं ज्ञान से बौद्धिक विकास करते हुए आध्यात्मिक रूप से समृद्ध हो। उन्होंने कहा कि युवा नेशन फर्स्ट, नेशन मस्ट एवं नेशन ऑलवेज के भाव के साथ पूर्ण समर्पित भाव से राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनें। उन्होंने युवाओं को राम, रावण, श्रीकृष्ण और गीता के प्रसंगों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने आगे कहा कि युवा स्व का बोध करें अपनी कमियों को जानें। उन्होंने युवाओं को गाली, गुस्सा और नफरत से दूर रहने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि युवा स्वस्थ रहने के लिए शाकाहारी बनें,अपने अंदर संस्कार एवं नैतिक मूल्यों को बनाए रखें, अपने माता पिता गुरुजनों का सम्मान करें और पंचकोष आधारित जीवन पद्धति अपनाएं। स्वयं मुस्कुराएं और दूसरों की मुस्कराहट का जरिया बनें। युवा सही व गलत में तथा सच्चे प्रेम और वासना में अंतर करना सीखें। उन्होंने कहा कि भारत विश्व गुरु था, विश्व गुरु है और विश्व गुरु रहेगा लेकिन उसके लिए युवाओं को शारीरिक रूप से स्वस्थ रहना होगा और मन से सात्विक होना आवश्यक है।
विद्या भारती के उत्तर क्षेत्र सह संगठन मंत्री श्री बालकिशन ने कहा कि 1952 से विद्या भारती देश में उच्च शिक्षा संस्थान चलाने वाली सबसे बड़ी गैर सरकारी संस्था है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एन॰ई॰पी॰) 2020 में समावेशी शिक्षा, मातृभाषा का सम्मान और उच्च कोटि के छात्रों को आचार्य बनाने की बात है और संस्कार युक्त गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की गारंटी है। उन्होंने युवाओं से पंचकोष सिद्धांत को शिक्षा पद्धति का हिस्सा बनाने पर जोर दिया ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो॰ दीप्ति धर्माणी ने कहा कि शिक्षा वह है जो हमें सब बंधनों से मुक्त करती है। भारतीय ज्ञान परंपरा विश्व में सर्वश्रेष्ठ है। उन्होंने कहा कि गीता में हमें कर्म करने के लिए प्रेरित किया गया है। विद्यार्थी अपने अंदर प्रश्नों और जिज्ञासा बनाएं रखें। उन्होंने आगे कहा कि हम विवाद की बजाय संवाद की दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने विद्यार्थियों को श्रीमद भगवत गीता के प्रसंगों से प्रोत्साहित किया।
समग्र शिक्षा विभाग चंडीगढ़ के अध्यक्ष श्री सौरभ चैधरी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में विद्यार्थियों के समग्र विकास का प्रावधान है। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वी॰पी॰ यादव ने कहा कि संस्कारयुक्त शिक्षा हमारा प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए।
डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ॰ सुरेश मलिक ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया और विश्वविद्यालय द्वारा संचालित कार्यक्रमों एवं उपलब्ध सुविधाओं पर विस्तृत जानकारी दी। बीएड कॉलेज प्राचार्य डॉ॰ अदम्यवीर ने सभी अतिथियों का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विभाग संघ चालक श्री सतनारायण मित्तल, बी॰जे॰पी॰ जिलाध्यक्ष वीरेंद्र कौशिक, कार्यकारी कुलसचिव प्रो॰ एस॰ के॰ कौशिक, पूर्व सूचना आयुक्त भूपेंद्र धर्माणी, शिक्षा बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वी॰ पी॰ यादव, डीन प्रो॰ सुनीता भरतवाल, प्रो॰ वी॰ के॰ जैन, बीएड कॉलेज प्राचार्य डॉ॰ आदम्यवीर, डॉ॰ वेद प्रकाश, डॉ॰ मुकेश यादव, डॉ॰ सोनल शेखावत, डॉ रचना शर्मा,जिला महामंत्री रमेश पचेरवाल, सूर्यप्रताप सहित अनेक कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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