मनोज वाल्मीकि
दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक होने का सर्वोच्च स्थान रखनेता,वाले भारत देश की राजनीति का स्तर इतना गिर जाएगा और माननीय (राजनेता) इतने मर्यादाहिन वे बदजुबा हो जाएंगे यह कभी सपने में भी सोचा नहीं होगा की मां शब्द जो अपने आप मैं एक पूरा ब्रह्मांड है, मां कि तपस्या और बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता, मां के ममता भरे शब्दों को जीवन और कर्म की डोर में पिरोया नहीं जा सकता, जगत जननी मां के पवित्र आंचल पर भद्दी भद्दी टिप्पणी और अप शब्दों का एक सार्वजनिक मंच पर माननियो के मुख से सुनने को मिलेंगे वो भी देश और प्रदेश की राजनीति में खानदानी विरासत रखने वाले कांग्रेस के राहुल गांधी और बिहार के आरजेडी नेता तेजस्वी यादव द्वारा बिहार की एक जनसभा के साजा मंच पर। मोदी की मां के रूप मां शब्द का अपमान किया गया है। सवाल यह नहीं है की मां तेरी है या मेरी, मां शब्द के आगे कोई शब्द नहीं होता। लेकिन इन माननियो के लिए मां जैसे शब्द कोई मायने नहीं रखते उनके लिए तो सिर्फ और सिर्फ राज गद्दी मानीय रखती है, जिसके लिए वह मान मर्यादाओं की सभी सिमाओं को लांध कर उसे हासिल करना चाहते हैं। बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को गलियां देने को लेकर भाजपायों ने देश भर में जन आंदोलन छेड़ दिया है। और 4 सितंबर को बिहार बन्द आंदोलन का ऐलान है।
जिसको लेकर चंडीगढ़, महाराष्ट्र, उत्तराखंड,, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, कोलकाता, समेत देश भर में विरोध प्रदर्शन और प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी बिहार के नेता तेजस्वी यादव के जगह-जगह पतले फूके जा रहे हैं, नारी शक्ति भी सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रही है।
लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और मोदी सरकार पर वोट चोरी का मुद्दा उछाल रखा जिसे गर्माने के लिए वोट यात्रा शहर ओर गांव विशेष कर बिहार में बोट यात्रा निकला जा रही है क्योंकि दो माह बाद नवंबर में बिहार विधानसभा चुनाव होने हैं। इंडिया गठबंधन का पूर्ण समर्थन है। राहुल गांधी कि वोट यात्रा बिहार के दरभंगा पहुंचने पर स्वागत के लिए कांग्रेस और आरजेडी नेताओं ने एक साझा मंच बनाया जैसे ही राहुल की वोट यात्रा पहुंची राहुल गांधी व तेजस्वी यादव का दोनों दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भव्य स्वागत किया बाद में इसी मंच पर जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को भद्दी भद्दी गलियां दी, साथ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी तीखे प्रहार किया एसा बोलकर बिहार सत्ता की दहलीज तक पहुंचाना चाहते हैं इसीलिए वे भाषण देते देते इतने आवेश में आगे की शायद वह यह भूल बैठे की उनको भी जन्म देने वाली एक मां ही है।
जनसभा के बाद उन्होंने अपने दिए भाषण पर कुछ अफसोस जरूर किया होगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ वह मोदी की मां को और मोदी को गाली देना अपने आप पर गर्व महसूस किया लोकेशन संबोधन के बाद वह खुश दिखाई दिए। मोदी को गाली देना तो समझ में आता है क्योंकि मोदी एक राजनेता है और नेताओं के लिए सब स्वाभाविक है लेकिन मोदी की मां को गाली देना यह समझ से पर है क्योंकि मोदी की मां नहीं हुए समाज से भी है और ना ही वे राजनीतिक और कबीर राजनीतिक का पहलू भी नहीं पड़ा फिर उन्हें गाली देना क्या दर्शाता है। अभी तक तो नेताओं पर जूता फेंकना, सियाही फेंकना, अंडा फेंकना, टमाटर फेंकना, पोस्टरो पर सियाही पोतना, थप्पड़ मारना कॉले झंडा दिखाना सड़क से लेकर सदन तक एक दूसरे को गालियां देना और हाथापाई करना औरआरोप प्रति आपरो लगाना तो सुना और देखा था। लेकिन एक मां को जनसभा के मंच से गालियां देना नहीं सुना था। मां तेरी है, या मेरी सवाल नहीं है, क्योंकि मां तो मां ही होती है। जिसका कोई वर्णन नहीं किया जा सकता। क्योंकि मां जगत जननी, दया की सागर, जिसके मर्यादा और संस्कारों से भरे आंचल में बचपन खेलता और खिलाता है, मां ही शिक्षा का वो पहला द्वार है जहां से हर कोई संस्करवान बनकर मां के आंचल का पल्लू पड़कर सड़क पर चलना सिखाता है और शिक्षा के मंदिर तक पहुंचता है, जहां से उसके जीवन का एक नया सफर शुरू होता है। लेकिन राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने साझा मंच से देवी सामान नरेंद्र मोदी की मां जो इस समय जीवित नहीं है को अप शब्द कहकर मोदी या मोदी की मां का अपमान नहीं किया बल्कि नारी जाति का अपमान किया।
इस अपमान को लेकर एक बेटा होने के नाते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने विरोधियों को फटकार लगाने में देरी नहीं की। मोदी ने बिहार कि ही एक जनसभा बोलते हुए कहा कि भारत वर्ष में मां का स्थान सर्वोपरि है। मां की गरिमा मां का सम्मान, उसका स्वाभिमान बहुत बड़ी प्राथमिकता है। मां ही तो हमारा संसार होती है, मां ही स्वाभिमान होती है फिर मां मेरी हो या उनकी यह यह सवाल नहीं है सवाल तो मन को गाली देने का है। मोदी ने कहां की सत्ता पाने से छटपटा रहे राहुल गांधी, बिहार के तेजस्वी यादव ओर इंडिया गठबंधन के सभी नेता मोदी और मोदी की मां को गाली देकर सत्ता की दहलीज तक पहुंचाना चाहते हैं क्योंकि उन्हें देशवासियों ने पूरी तरह से नकार दिया है। मोदी ने आगे कहा कि मेरी उस मां को गाली दी गई जो अब संसार में भी नहीं है, वो भी बिहार की उस पवित्र धरती पर जहां पर छट मैया की पूजा होती हो और नारी शक्ति को देवी देवताओं से ज्यादा सम्मान दिया जाता हो। मोदी ने भावुकता भरे स्वर में कहा कि मैं अपना दर्द बिहार की माता बहनों से साझा कर रहा हूं, क्योंकि मेरी मां को गाली देना यह मोदी का अपमान नहीं है, बल्कि बिहार वे पूरे भारत की हर एक मां, बहन, बेटी का अपमान है। क्याकि बिहार उस मा को जिसका राजनीति से कोई मतलब वास्ता नहीं था और ना ही रहा है, उसको गालियां देना बिहार के लोग स्वीकार करेंगे। मोदी ने यह भी कहा कि उसकी मां ने यह कहकर अपने से अलग किया था की जाओ मोदी बेटा देश की सेवा करो भारत माता को तुम्हारी जरूरत है और मां के कहने से ही मैं माता बहनों का सबसे ज्यादा मान सम्मान करता आ रहा हूं यह पूरा देश जान रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहीं पर नहीं रुके उन्होंने अपने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि यह वही है जिन्हें देश का नाम विश्व पटल पर एक विकसित देश के रूप में लिया जाना अच्छा नहीं लग रहा है और यह लोग कभी अमेरिका चीन पाकिस्तान बांग्लादेश जाकर देश के अपमान कर रहे हैं ताकि मोदी कमजोर हो और हमें मौका मिल सके लेकिन अब उन्हें मौका मिलने वाला नहीं है क्योंकि देश की 140 करोड़ जनता सब कुछ जानती है इसलिए उन्होंने तीसरी बार देश की बागडोर मोदी को सौंप है।
राहुल गांधी बिहार व तेजस्वी यादव और इंडिया गठबंधन के नेता और कार्यकर्ताओं को मोदी की मां को गाली देने का जरा भी मलाल नहीं है और नाही उन्होंने अपनी इस गलती की माफी भी नहीं मांगी। भले ही देश के कौन है कोने में विरोध प्रदर्शन और पुतले जलाए जा रहे हो इससे उनके ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ता और ना ही पढ़ने वाला है ऐसा वह खुद ही महसूस कर रहे हैं बल्कि अपनी इस गलती पर गर्व महसूस कर रहे हैं। जबकि यह उन्हें भी मालूम है कि वर्तमान में जो राजनीतिक खेल खेला जा रहा है वह देश को गर्क की ओर ही ले जाएगा विकास या उत्थान की ओर नहीं। और जो राजनीतिक उठा पटक और जुबानी जंग चल रही है उससे देश की मान मर्यादा और संस्कार भी खत्म हो जाएंगे लेकिन वह भी क्या करें उनके सामने मोदी को गाली देना तू तडांग करना, हिंदुत्व का अपमान करना मजबूरी है क्योंकि उन्हें सत्ता मिले या ना मिले पर राजनीति में बने रहना और अपने को बचाए रखना है। यही मानसिकता सत्ता से दूर बैठे हर एक नेता की बन गई है।
मनोज वाल्मीकि नगीना।
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