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पदमा में उल्लासपूर्ण तरीके से मनाया गया प्रकृति पर्व कर्मा

●मांदर की थाप और करमा गीत की जगह ले रहा डीजे का शोर●

संवाददाता पदमा, समाज जागरण

पदमा- प्रकृति और भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक पर्व कर्मा पूजा गुरुवार को पदमा सहित आसपास के गांवों में बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। ग्रामीणों ने विधि-विधान से कर्मा वृक्ष की पूजा कर प्रकृति माता से खुशहाली, सुख-समृद्धि और भाईयों की लंबी आयु की कामना की।
झारखंड में कर्मा पर्व सदियों से सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मनाया जाता है। परंपरा के अनुसार, पूजा से पहले गांव की महिलाएं और पुरुष मिलकर कर्मा वृक्ष की टहनी को लाकर अखाड़ा स्थल या आंगन में गाड़ते हैं। पूजा में दूध-धान, अन्न, फल और फूल का विशेष महत्व होता है। महिलाएं व्रत रखकर करमा गीत गाती हैं और देर रात तक सामूहिक नृत्य-गान होता है। माना जाता है कि यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते और प्रकृति के संरक्षण का प्रतीक है।
पहले जहां गांव-गांव में मांदर, नगाड़ा और झांझ की थाप पर करमा गीतों की गूंज सुनाई देती थी, वहीं अब आधुनिकता के प्रभाव से डीजे का शोर पारंपरिक स्वर को दबाने लगा है। युवाओं का झुकाव डीजे पर नृत्य की ओर बढ़ गया है। बावजूद इसके, महिलाओं और बुजुर्गों ने पारंपरिक करमा गीत गाकर और पूजा-अर्चना कर पर्व की गरिमा को जीवित रखा है।
पूजा के बाद देर रात तक सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य और गीत-संगीत का आयोजन होता रहा। गांव-गांव में भक्तिमय और उत्सवी माहौल देखने को मिला।


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