योगेश्वर कृष्ण माखन चोर नहीं,न राधा से था कोई संबंध-डॉ जयेन्द्र आचार्य
कृष्ण का जीवन आप्त पुरुषों जैसा निष्कलंक था- ममता आर्या
गाजियाबाद,शनिवार,२३ अगस्त २०२५, वेद प्रचार परिषद द्वारा आदर्श पब्लिक स्कूल,मकनपुर इन्दिरापुरम गाजियाबाद में अमावस्या पर यज्ञ और प्रवचन का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
वैदिक विदुषी ममता आर्या ने अमावस्या के पावन अवसर पर यज्ञ कराया और बच्चों तथा अध्यापकों को बताया कि भगवद्गीता में श्रीकृष्ण भगवान ने यज्ञ न करने वाले को पापी बताया है।उन्होंने श्रीकृष्ण जीवन चरित्र पर विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि महाभारत में श्रीकृष्ण का जीवन आप्त पुरुषों जैसा निष्कलंक था।
मुख्य वक्ता डा. जयेन्द्र आचार्य (कुलपति आर्ष गुरुकुल नोएडा) ने अपने वक्तव्य में बताया कि बुद्धि दो प्रकार की होती है स्वाभाविक और नैमित्तिक।मनुष्य को परमात्मा ने नैमित्तिक बुद्धि दी है,उसे सब कुछ सीखना पड़ता है जबकि अन्य सभी प्राणियों को उनकी आवश्यकता का ज्ञान उन्हें जन्म से ही मिल जाता है इसलिए मनुष्य को सिखाने और संस्कारित करने की जरूरत होती है। श्रीकृष्ण योगीराज थे। १२ वर्ष की आयु में वह गुरुकुल चले गए,गुरु संदीपन के आश्रम में पढ़ाई की। उन्होंने न गोपियों के साथ रास रचाया,न माखन चुराया,न कोई अनैतिक कार्य किया।पूरे महाभारत और भगवदगीता में कहीं भी उनका संबंध राधा नाम के किसी पात्र से नहीं रहा।राधा को कृष्ण के साथ जोड़ना एक बड़ा षडयंत्र है।श्रीकृष्ण जैसा नीति वान,राजनीतिज्ञ,विनम्र,सदाचारी, ज्ञानी व्यक्ति महाभारत में अन्य कोई नहीं है।उनकी रूक्मिणी ही एक मात्र पत्नी थी और बारह साल के कठोर व्रत के बाद प्रद्युम्न नामक एक पुत्र पैदा हुआ जो हूबहू श्रीकृष्ण के समान ही दिखता था।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंध निदेशक सुबोध त्यागी ने सबका धन्यवाद किया और बच्चों को प्रवचन की मुख्य बातों को अपने जीवन में धारण करने का आवाहन किया।
समाज सेवी व जे पी एस पब्लिक स्कूल के संस्थापक विनोद त्यागी ने बच्चों को बताया कि मनुष्य जीवन अमावस्या के समान अंधेरे से घिरा रहता है जैसे अमावस्या के बाद चन्द्रमा धीरे धीरे बढ़ता जाता है और पौर्णिमा तक पूर्ण हो जाता है ऐसे ही हमें धीरे धीरे विद्या अर्जन करना चाहिए और अधिक से अधिक ज्ञान अर्जित करना चाहिए।
मीडिया प्रभारी प्रवीण आर्य ने अपने संदेश में कहा कि इस तरह के पब्लिक स्कूलों में आध्यात्मिक कार्यक्रम निरंतर होते रहने चाहिए ताकि युवा पीढ़ी मातृपितृ भक्त, देशभक्त और सुसंस्कारित हो सके।
महायज्ञ की ब्रह्मा ममता आर्या ने शान्ति पाठ कराया और सबका धन्यवाद किया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से यज्ञवीर आर्य, अनिल टंडन,राजन जी,जीतेन्द्र अग्रवाल और विद्यालय के सभी शिक्षक उपस्थित रहे।
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