समाज जागरण पटना जिला संवाददाता:- वेद प्रकाश
पटना/ जिले के मसौढ़ी में मैट्रिक परीक्षा छूट जाने से आहत एक छात्रा ने चलती ट्रेन से कूदकर आत्महत्या कर ली। जिसने पूरे इलाके में शोक और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मसौढ़ी के खरजमा गांव की रहने वाली छात्रा कोमल कुमारी की परीक्षा मंगलवार को बरनी स्थित परीक्षा केंद्र पर निर्धारित थी। परीक्षा केंद्र उसके रिश्तेदार के गांव महाराजचक से लगभग छह किलोमीटर की दूरी पर था। कोमल परीक्षा देने के लिए एक दिन पहले ही सोमवार को अपने रिश्तेदार के यहां पहुंच गई थी, ताकि समय पर परीक्षा केंद्र पहुंच सके। बताया जा रहा है कि परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के लिए सुबह 9 बजे तक का समय निर्धारित किया गया था।
हालांकि, कोमल कुमारी लगभग 9 बजकर 10 मिनट पर परीक्षा केंद्र पहुंची। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के कारण परीक्षा केंद्र का मुख्य द्वार बंद कर दिया गया था। छात्रा ने केंद्र में प्रवेश के लिए काफी प्रयास किया, लेकिन परीक्षा नियमों के अनुसार उसे अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। इससे वह काफी निराश और मानसिक रूप से आहत हो गई। परीक्षा केंद्र से लौटने के बाद छात्रा नदौल रेलवे स्टेशन पहुंची और वहां से एक ट्रेन में सवार हो गई। कुछ ही देर बाद तरेगना और मसौढ़ी कोर्ट रेलवे स्टेशन के बीच महाराजचक गांव के पास उसने चलती ट्रेन से छलांग लगा दी। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों और पुलिस ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना से परिजनों में गहरा शोक और मातम का माहौल है। ज्ञात हो कि राज्यभर में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा मैट्रिक परीक्षा का आयोजन कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच किया जा रहा है। परीक्षा के दूसरे दिन गणित विषय की परीक्षा दोनों पालियों में आयोजित की गयी है। राज्य के कुल 1699 परीक्षा केंद्रों पर कुल 15 लाख 12 हजार परीक्षार्थी परीक्षा दे रहे हैं। जिनमें छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है।
पहली पाली में लगभग 7 लाख 58 हजार परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं, जबकि दूसरी पाली में करीब 7 लाख 54 हजार परीक्षार्थी परीक्षा देंगे। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पुलिस बल की तैनाती के साथ सभी परीक्षार्थियों की सघन जांच के बाद ही उन्हें परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया जा रहा है। परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने कई सख्त नियम लागू किए हैं। इनमें परीक्षार्थियों को जूते और मोजे पहनकर परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई है, ताकि जांच प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाया जा सके। मैट्रिक परीक्षा के दौरान जहां एक ओर प्रशासन द्वारा सख्त सुरक्षा और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर छात्रा की आत्महत्या की घटना ने परीक्षा के दबाव और मानसिक तनाव की गंभीरता को उजागर किया है। यह घटना अभिभावकों, शिक्षकों और प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि छात्रों को परीक्षा के दौरान मानसिक रूप से सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है।
Discover more from समाज जागरण
Subscribe to get the latest posts sent to your email.



