दैनिक समाज जागरण, संवाददाता, बिकाश
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के द्वितीय दिन सविता महतो ने अल्प सूचित प्रश्न के माध्यम से चांडिल डैम परियोजना से प्रभावित 84 मौजा और 116 गांव के विस्थापितों का मामला प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सदन में कहा कि वर्षों बीत जाने के बावजूद परियोजना से प्रभावित परिवारों को अब तक समुचित पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। विधायक ने सरकार का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान पुनर्वास नीति में आरएल से संबंधित कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जिससे प्रभावित परिवारों को भूमि संबंधी अधिकारों और सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि विभागीय स्तर पर पिछले दो वर्षों से इस विषय पर कोई ठोस बैठक या पहल नहीं की गई है, जिससे विस्थापितों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। सविता महतो ने मांग की कि 116 गांवों के सभी प्रभावित विस्थापित परिवारों को पुनर्वास, आवास, मुआवजा, बुनियादी सुविधाएं, नियोजन तथा आजीविका के समुचित साधन उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही उन्होंने चांडिल डैम अंतर्गत विभाग द्वारा पुनर्वास नीति के तहत चयनित 22 पुनर्वास स्थलों में से 13 पुनर्वास स्थलों का आंशिक रुप से विकास हुआ एवं 9 पुनर्वास स्थल को पूर्ण रुप से विकास करने का मांग किया। उन्होंने कहा कि विस्थापितों के साथ न्याय सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इस दिशा में शीघ्र ठोस कदम उठाए जाने का मांग किया।
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