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मोतीबाग डंपिंग यार्ड मामला: एनजीटी ने गठित की जांच समिति, बिहार सरकार और नगर परिषद को नोटिस

आरटीआई एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता मोहम्मद अंसार खान की याचिका पर एनजीटी का बड़ा आदेश, वर्षों से प्रदूषण झेल रहे लोगों को राहत की उम्मीद

किशनगंज | समाज जागरण ब्यूरो | वीरेंद्र चौहान

किशनगंज नगर परिषद क्षेत्र के मोतीबाग वार्ड संख्या-7 स्थित डंपिंग यार्ड मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की पूर्वी क्षेत्र पीठ, कोलकाता ने बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार, 23 जुलाई को हुई सुनवाई में एनजीटी ने मामले की जांच के लिए समिति गठित करने और बिहार सरकार, किशनगंज नगर परिषद सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश राष्ट्रीय आरटीआई एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता मोहम्मद अंसार खान द्वारा दायर मूल आवेदन संख्या 100/2026/EZ (मोहम्मद अंसार खान बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) पर सुनवाई के बाद पारित किया गया।

वैज्ञानिक तरीके से कचरा निस्तारण नहीं होने का आरोप

याचिका में कहा गया है कि मोतीबाग स्थित लगभग पांच एकड़ में फैले डंपिंग यार्ड में वर्षों से पूरे शहर का ठोस कचरा डंप किया जा रहा है। आरोप है कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 का पालन नहीं किया जा रहा, जिससे पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है और आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

एनजीटी ने सभी संबंधित पक्षों से जवाब तलब करते हुए गठित जांच समिति को स्थल निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

स्थानीय लोगों में वर्षों से नाराजगी

मोतीबाग डंपिंग यार्ड को लेकर स्थानीय लोगों में लंबे समय से आक्रोश है। उनका कहना है कि पूरे शहर का कचरा यहां डंप किए जाने से क्षेत्र में लगातार दुर्गंध, गंदगी और प्रदूषण की समस्या बनी हुई है। वैज्ञानिक निस्तारण नहीं होने के कारण मक्खी-मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है।

करीब 2,500 लोगों की आबादी प्रभावित

स्थानीय निवासी एवं हॉस्टल संचालक दिलीप कुमार झा के अनुसार डंपिंग यार्ड के आसपास लगभग 2,500 लोग निवास करते हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि दुर्गंध और प्रदूषण के कारण कई परिवार अपनी जमीन और मकान बेचकर क्षेत्र छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। इतना ही नहीं, आंदोलन करने वाले लोगों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज कराए गए।

स्वच्छ पर्यावरण नागरिकों का संवैधानिक अधिकार

याचिकाकर्ता मोहम्मद अंसार खान ने कहा कि यह मामला केवल कचरा प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों के स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण में जीने के संवैधानिक अधिकार से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने एनजीटी से पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित कराने और डंपिंग यार्ड के वैज्ञानिक प्रबंधन के निर्देश देने की मांग की है।

जांच रिपोर्ट के आधार पर होगी अगली सुनवाई

एनजीटी द्वारा गठित जांच समिति अब मोतीबाग डंपिंग यार्ड का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट अधिकरण को सौंपेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर मामले की अगली सुनवाई होगी।

स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के हस्तक्षेप के बाद वर्षों से चली आ रही इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कार्रवाई होगी।


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