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नधिरा का आयुर्वेद अस्पताल बदहाल, डॉक्टर नदारद-चपरासी के भरोसे दवा वितरण!

समाज जागरण/ सन्तोष कुमार

म्योरपुर/ सोनभद्र। स्थानीय विकास खंड के ग्राम पंचायत नधिरा में स्थित राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय इन दिनों बदहाली का शिकार है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां तैनात चिकित्सक डॉ. आनंद सिंह नियमित रूप से अस्पताल नहीं आते हैं शायद कभी आए भी होंगे तो आसपास के लोग पहचान भी नहीं पाए होंगे। कंप्यूटर ऑपरेटर का पद लंबे समय से खाली है, वहीं कंपाउंडर का चार माह पूर्व नौडीहा के लिए स्थानांतरण हो चुका है। ऐसे में पूरा अस्पताल चपरासी के भरोसे चल रहा है। अस्पताल में तैनात चपरासी दीपक गोंड़ ने बताया कि पहले उनके पिताजी यहां नौकरी करते थे, उनकी मृत्यु के बाद मृतक आश्रित कोटे में उन्हें नौकरी मिली है। अस्पताल प्रतिदिन समय पर खुलता है, लेकिन दवा वितरण का कार्य उन्हीं के द्वारा किया जाता है। दीपक के द्वारा यह भी बताया गया कि पहले मेरे पिताजी नौकरी करते थे तो हम दवा देना उन्हीं से सीखे हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट के महत्वपूर्ण प्रश्न -:

लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि पिता के अनुभव के आधार पर अस्पताल चलाना और लोगों का उपचार करना यह छूट किसके द्वारा दी गई? यदि किसी के साथ कोई कैजुअल्टी हो जाती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? यदि डॉक्टर आनंद सिंह की तैनाती राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय में है तो वे लंबे समय से कहां नौकरी करते हैं? इससे पूर्व में यदि दीपक के पिता भी चपरासी के पद पर होते हुए लोगों का उपचार कर रहे थे इसका तात्पर्य यहां डाक्टरों की कोई जिम्मेदारी नहीं? जिले के स्वास्थ्य विभाग की टीम लोगों के उपचार के प्रति इतनी लापरवाह क्यों?

दान की जमीन पर बना था अस्पताल, अब खंडहर में तब्दील

इस अस्पताल का अपना इतिहास है। सवर्ण आर्मी बभनी के ब्लॉक अध्यक्ष पंडित ज्ञान वल्लभ दुबे उर्फ ज्ञानू महाराज बताते हैं कि उनके दादाजी ने नधिरा गांव में लगभग डेढ़ बीघा जमीन विद्यालय और अस्पताल के लिए दान में दी थी। उसी जमीन पर कंपोजिट विद्यालय और आयुर्वेद चिकित्सालय संचालित होता था।

देख-रेख और रख-रखाव के अभाव में कच्चे निर्माण वाला पुराना अस्पताल पिछले वर्ष बारिश में गिर गया। बगल में ही चिकित्सकों व कर्मचारियों के रहने के लिए बना पक्का मकान आज खंडहर में तब्दील हो चुका है। दान दी गई जमीन पर धीरे-धीरे अतिक्रमण भी हो रहा है।
वर्तमान में यह चिकित्सालय भवन के अभाव में गांव के पंचायत भवन में संचालित हो रहा है।

ज्ञान वल्लभ दुबे ने जिलाधिकारी सोनभद्र से मांग की है कि पंचायत भवन में चल रहे इस आयुर्वेद चिकित्सालय के लिए नए भवन का निर्माण कराया जाए और स्थायी चिकित्सक की तैनाती की जाए, जिससे आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों को उचित चिकित्सा सुविधा मिल सके और उनके पूर्वजों के दान का उद्देश्य भी पूरा हो सके।


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