बालिका उच्च विद्यालय, किशनगंज से अभियान की शुरुआत, 30 मार्च को मॉप-अप दिवस
वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
25 मार्च।
बच्चों का स्वस्थ जीवन एक समृद्ध समाज की आधारशिला है, लेकिन कृमि संक्रमण जैसी अदृश्य समस्या उनके शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास को प्रभावित करती है। यह संक्रमण बच्चों में कुपोषण, कमजोरी और शैक्षणिक पिछड़ापन का कारण बनता है। इसी समस्या के समाधान के लिए जिले में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के तहत व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।
अभियान का शुभारंभ बुधवार को बालिका उच्च विद्यालय, किशनगंज में सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बालिकाओं को कृमिनाशक दवा खिलाकर किया। इस दौरान बच्चों को दवा के महत्व और उसके सही सेवन की जानकारी भी दी गई।
11.22 लाख बच्चों को दवा देने का लक्ष्य
जिला कार्यक्रम प्रबंधक के अनुसार, जिले में कुल 11,22,744 बच्चों को कृमिनाशक दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से दवा वितरण किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
जो बच्चे मुख्य दिवस पर दवा नहीं ले पाएंगे, उनके लिए 30 मार्च को मॉप-अप दिवस आयोजित किया जाएगा। इस दिन छूटे हुए बच्चों को चिन्हित कर दवा दी जाएगी।
आयु के अनुसार दी जा रही दवा
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि एल्बेंडाजोल दवा बच्चों को उनकी आयु के अनुसार दी जाती है। 1 से 2 वर्ष के बच्चों को आधी गोली (200 मिलीग्राम) तथा 2 से 19 वर्ष तक के बच्चों को एक पूरी गोली (400 मिलीग्राम) दी जाती है। छोटे बच्चों को दवा कुचलकर दी जाती है, जबकि बड़े बच्चे इसे चबा कर या पानी के साथ ले सकते हैं।
उन्होंने बताया कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और इसे स्वास्थ्यकर्मियों, शिक्षकों तथा आंगनबाड़ी सेविकाओं की देखरेख में ही दिया जाता है।
अधिकारियों ने किया निरीक्षण
कार्यक्रम के दौरान जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार एवं जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. मुनाजिम मौजूद रहे। जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में विद्यालयों का दौरा कर बच्चों को दवा खिला रहे हैं।
डीसीएम सुमन सिन्हा ने बहादुरगंज और दिघलबैंक प्रखंड में अभियान का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और आवश्यक निर्देश दिए।
अभिभावकों से सहयोग की अपील
सिविल सर्जन ने अभिभावकों, शिक्षकों और आमजन से अपील की है कि वे इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग करें और सुनिश्चित करें कि कोई भी बच्चा दवा लेने से वंचित न रह जाए। उन्होंने कहा कि एक भी बच्चा छूटने पर संक्रमण का खतरा बना रहता है।



