सौरभ कुमार,दैनिक समाज जागरण,संवाददाता,झारखंड
जमशेदपुर (जादूगोड़ा) 24 सितंबर 2025:– दुर्गा पूजा का एक विशेष अनुष्ठान नवपत्रिका स्नान और पूजन है शास्त्रों में कहा गया है कि नवपत्रिका के प्रत्येक पत्ते और वृक्ष के पीछे एक दिव्य शक्ति छिपी होती है। यह नवपत्रिका देवी दुर्गा की नौ शक्तियों द्वारा निर्मित है।
प्रत्येक पत्ते के पीछे दिव्य शक्ति
1 कालापात (केले का पेड़) – देवी ब्रह्मचारिणी। जीवन में शक्ति और सहनशक्ति प्रदान करती हैं।
2 कोलोकेशिया (अरबी) – देवी कालरात्रि। बुरी शक्तियों का नाश करती हैं।
3 हलुदगछ – देवी दुर्गा। सभी रोगों और दुखों को दूर करती हैं।
4 जयंती पाटा – देवी कार्तिकेय। विजय का प्रतीक।
5 बिल्वपत्र (बेलगछ) – भगवान शिव का प्रिय, देवी पार्वती का प्रतीक। विश्व में शांति लाता है।
6 धान का पौधा – देवी लक्ष्मी। अन्न, धन और समृद्धि प्रदान करता है।
7 मनकचू के पत्ते – देवी चंडी। शत्रुओं का नाश करने की शक्ति।
8 अशोक के पत्ते – देवी शिवानी। भय और दुःख दूर करते हैं।
9 सेसबानिया के पत्ते – देवी गंगा। जीवन को पवित्र करते हैं।
शास्त्रों के अनुसार, नवपत्रिका देवी दुर्गा की जीवन शक्ति का प्रतीक है। देवी इन नौ पौधों के बीच एक नए रूप में विराजमान हैं। इसलिए, नवपत्रिका पूजा का अर्थ केवल एक वृक्ष या कलश की पूजा करना नहीं है, बल्कि महाशक्ति के नौ रूपों का एक साथ आह्वान करना है। जब हम नवपत्रिका में स्नान और पूजा करते हैं, तो हम वास्तव में अपने जीवन में देवी दुर्गा की नौ शक्तियों का आह्वान कर रहे होते हैं। प्रत्येक पत्ते के पीछे एक गुप्त चमत्कारी शक्ति छिपी होती है, जो दुःख, दरिद्रता, भय, बुरी शक्तियों को दूर करती है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती है,
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