वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
किशनगंज मंडल कारा में शनिवार देर शाम एक सजायाफ्ता बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिससे जेल प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतक की पहचान ठाकुरगंज थाना क्षेत्र के मल्हाबारी निवासी 60 वर्षीय कैलाश कामती के रूप में हुई है।
बताया जा रहा है कि कैलाश कामती की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें आनन-फानन में सदर अस्पताल किशनगंज ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
गंभीर बीमारी के बावजूद समय पर इलाज नहीं?
अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार मृतक कुष्ठ रोग से पीड़ित था और उसकी हालत पहले से ही नाजुक थी। सवाल यह उठ रहा है कि इतनी गंभीर बीमारी से ग्रसित बंदी को समय रहते समुचित इलाज और निगरानी क्यों नहीं मिल सकी।
जेल प्रशासन का दावा बनाम परिजनों का आरोप
जेल अधीक्षक का कहना है कि बंदी का नियमित इलाज कराया जा रहा था और तबीयत बिगड़ते ही उसे अस्पताल भेजा गया।
वहीं, मृतक के बेटे दीपेश ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए आरोप लगाया कि उनके पिता को समय पर इलाज नहीं मिला और गंभीर हालत होने के बावजूद लापरवाही बरती गई।
दीपेश का कहना है कि पहले उन्हें केवल तबीयत खराब होने की सूचना दी गई, लेकिन कुछ ही देर बाद मौत की खबर मिली, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है।
पोस्टमार्टम से खुलेगा राज
मामले की गंभीरता को देखते हुए शव का पोस्टमार्टम प्रशासनिक निगरानी में कराया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।
शराबबंदी कानून के तहत था बंदी
कैलाश कामती शराबबंदी कानून के तहत दर्ज मामले में सजा काट रहा था। अब उसकी मौत ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या छोटी धाराओं में बंद कैदियों को भी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं?
बड़ा सवाल: क्या जेल बन रही है मौत का घर?
यह घटना एक बार फिर जेल प्रशासन की जवाबदेही और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
क्या यह एक सामान्य मौत है, या फिर सिस्टम की लापरवाही का परिणाम?
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