उमरिया, मध्यप्रदेश – जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल उस वक्त खुलती नजर आई जब यह सामने आया कि जिले की अधिकांश पैथोलॉजी लैब्स एवं एक्सरे बिना किसी मान्यता या प्रशिक्षित टेक्नीशियन के संचालित हो रही हैं। यह सब स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारो की निष्क्रियता को उजागर करती है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह एक बड़े हादसे का कारण बन सकता है। विश्वसनीय सूत्रों और स्थानीय जांच से पता चला है कि जिले में संचालित कई पैथोलॉजी लैबों के पास न तो आवश्यक लाइसेंस हैं और न ही वहां कार्यरत कर्मचारियों के पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यताएं। बिना डिग्रीधारी और अनुभवहीन व्यक्ति पैथोलॉजी जांच जैसे संवेदनशील कार्यों को अंजाम दे रहे हैं, जिससे मरीजों की जान पर खतरा मंडरा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग को इस बात की जानकारी होने के बावजूद अब तक किसी भी लैब पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई है। ऐसी स्थिति में सीएमएचओ की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है। जनहित में आवश्यक है कि ऐसे मामलों पर त्वरित जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते यह गंभीर मुद्दा नजरअंदाज किया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों व जनप्रतिनिधियों ने इस विषय पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि निजी मुनाफे के चलते कुछ लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं को व्यापार बना दिया है, और प्रशासन मौन होकर तमाशा देख रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं में इस तरह की लापरवाही न केवल मानवाधिकार का उल्लंघन है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम जनजीवन के साथ खिलवाड़ है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही एक बड़ी जनस्वास्थ्य आपदा का कारण बन सकती है।



