नेपाल मे छात्र राजनीति पर प्रतिबंध, स्कूल के नाम भी बदले जायेंगे।

नमस्कार मै रमन कुमार

नेपाल के नवनियुक्त बालेन शाह सरकार ने छात्र राजनीति पर प्रतिंबंध लगा दिया है। सरकार का मानना है कि कॉलेज युनिवर्सिटी को राजनीति का आखाड़ा नही बनना चाहिए। इसके अलावा सरकार ने उन सभी स्कूलों को नाम बदलने का आदेश दिया है जिनके ना अंग्रेजी मे है। “सेंट जेवियर्स’ ‘आक्सफोर्ड’ जैसे नाम वालों स्कूल को सख्त निर्देश दिया गया है कि वह स्थानीय पहचान को अपनाये। इसका असर नेपाल ज्यादा भारत के राजनीति पर पड़ने की संभावना जतायी जा रही है।

नेपाल की नवगठित ‘बालेन सरकार’ ने शिक्षा व्यवस्था की सूरत बदलने के लिए एक क्रांतिकारी ‘100 दिवसीय एक्शन प्लान’ सार्वजनिक किया है. प्रधानमंत्री बालेन शाह से नेतृत्व मे लिए गए फैसलों को उद्देश्य शिक्षा को राजनीति के चंगुल से मुक्त करना और अन्तर्राष्ट्रीय मानकों को अनुसार बनाना है।

शनिवार देर रात जो कारी किए गिए एक्शन प्लान के तहत अब नेपाल के स्कूल और विश्वविद्यालयों मे राजनीतिक दलों से जुड़े राजनीतिक संगठनों के लिए कोई जगह नही होगा। बालेन केबिनेट मे साप स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षण संस्थान अब राजनीतिक केन्द्र नही बल्कि केवल और केवल ज्ञान का केन्द्र होगा। सरकार का कहना है कि शिक्षण संस्थानों मे होने वाली राजनीतिक हस्तक्षेप से छात्रों के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। उसके वास्तविक आवाज को दबा दिये जाते है। उनके वास्तविक आवाज को जगह मिले इसके लिए यह घोषणा की गई है।

प्लान एक्शन की 5 बाते

प्लान एक्शन मे छात्र राजनीति पर पूर्ण प्रतिबंध होगा । सरकार ने राजनीतिक दलों से जुड़े सभी छात्र संगठनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। अगले 60 दिनों के अन्दर इन सभी संगठनों को शैक्षणिक परिसर से अपनी सभी संरचनाए एव कार्यालय को हटानी होगी।

स्टूडेंट काउण्सिल का उदय

दलगत राजनीतिक की जगह अब छात्रों की वास्तविक समस्या को सुनने के लिए अगले 90 दिनों मे ‘स्टूडेंट काउण्सिल’ या ‘वायस ऑफ स्टूडेंट’ जैसे गैर राजनीतिक तंत्र विकसित किए जायेंगे।

नागरिकता की शर्त भी खत्म

सरकार ने ग्रेडुएशन की पढ़ाई के लिए नेपाली नागरिकता की अनिवार्यता को भी समाप्त कर दिया है, ताकि दस्तावेज के कारण किसी भी छात्र के शिक्षा न रुकें। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों मे परिक्षा परिणाम मंत्रालय द्वारा निर्धारित कैलेण्डर के अनुसार ही प्रकाशित करने का निर्णय लिया गया है।

स्कूल के विदेशी नामों पर भी बैन।

नेपाल मे विदेशी नामों के साथ चल रहे स्कूलों को भी नेपाली नाम रखने का निर्देश दिया गया है। ‘सेंट जेवियर्स’ ‘आक्सफोर्ड’ जैसे नामों को बदलकर स्थानीय और नेपाली नाम रखने के लिए कहा गया है, ताकि स्थानीय पहचान बना रहे।

परीक्षा मुक्त बचपन

इसके साथ ही सरकार ने बचपन से परीक्षा की बोझ कम करते हुए कक्षा पांच तक के लिए होने वाली परीक्षा को समाप्त कर दिया है। अब उनके प्रगति का आकलन ‘वैकल्पिक मुल्यांकन’ प्रणाली के साथ किया जायेगा ।

सिंडिकेट और हस्तक्षेप का अंत

नेपाल के नवनियुक्त सरकार का मानना है के विश्वविद्यालयों के परीक्षा परिणामों में देरी और शैक्षणिक कैलेण्डर का बिगड़न के लिए राजनीतिक सिंडिकेट जिम्मेदार है। अब मंत्रालय द्वारा जारी कैलेण्डर के अनुसार ही परिणाम प्रकाशिक करना अनिवार्य होगा। यह कदम नेपाल के उन हजारों छात्रों के लिए राहत की खबर है जो सत्र मे देरी के कारण विदेश पलायन कर जाते है।

फैसला को लेकर नेपाल और भारत मे एक साथ तारीफ हो रही है। इसको साथ ही भारत के तथाकथित हिंदुत्ववादी सरकार से सवाल किए जा रहे है । लोगों का कहना है कि अब भारत को नेपाल से सीख लेने की जरूरत है। भारत के शिक्षण संस्थानों को भी राजनीति अखाड़ा बनने के बचाने की जरूरत है। जहाँ बच्चे भविष्य सवारने जाते है लेकिन राजनीतिक के मकड़जाल मे फंस कर न सिर्फ अपना भविष्य बर्बाद करते है बल्कि देश के भविष्य को भी अंधकारमय बनाते है।

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