फुलचांद पारित, समाज जागरण, प्रखंड संवाददाता (नीमडीह)
चांडिल : नीमडीह प्रखंड के पितकी, बाना, लायाडीह, चिगड़ीडीह, वनडीह, पुशपुतुल आदि गांव में दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी के हाथियों के झुंड भोजन की तलास में भटकते हुए बाना जंगल में डेरा डाला है। शाम ढलते ही हाथियों के झुंड जंगल से उतर कर गांव में प्रवेश कर किसान का फसल लौकी, कद्दू, खीरा, टमाटर, आदि को अपना निवाला बना रहा साथ ही पैर तले कुचल दे रहा है। किसान की घर में रखे धान, अनाज को घर तोड़कर खा रहा है। बुधवार के रात पितकी गांव के हरकिनठाड़ के साथ लायाडीह के ग्रामीण मशाल लेकर हाथियों की झुंड को गांव में प्रवेश न कर सके इसलिए लोगो ने रात भर ऊंचे जगह पर डेरा डाल कर रातजगा किया। तब हाथियों के झुंड दूसरे गांव में पहुंच कर उत्पात मचाने लगा। एक महीना से दलमा सेंचुरी से आए गजराज का झुंड अंडा, लावा, जुगीलोंग, चतरमा, कुशापुतुल, बाना आदि जंगल में अलग अलग दल बनाकर डेरा डाला हुआ है। चांडिल डैम जलाशय में भरपूर पानी और विभिन्न गांव में पर्याप्त मात्रा में भोजन मिलने के कारण इन क्षेत्र में गजराज का झुंड बारह महीने विचरण करते देखा जाता है। दुर्भाग्य की बात है नीमडीह थाना क्षेत्र के विभिन्न जंगल की तराई में अवैध रूप से देशी दारू की चुलाई होती है। ग्रामीण बताते है कि महुआ की चुलाई से बचे अवशेष को खा कर गजराज की झुंड नशे में मदमस्त होकर गांव में उत्पात मचाने लगते है। मनुष्य को देखते ही आक्रोशित होकर दौड़ाने लगते है। कई बार हाथियों को खदड़ने की दौरान ग्रामीण घायल भी हो जाते है।
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