अनिल कुमार अग्रहरी / समाज जागरण
डाला/सोनभद्र। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी निषाद राज बोट योजना, जिसका उद्देश्य मछुआ समुदाय को आत्मनिर्भर बनाना है, वही योजना अब सोनभद्र जनपद में घोटालों के घेरे में आ गई है। नाव वितरण प्रक्रिया को लेकर सामने आई अनियमितताओं ने न केवल मत्स्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि शासन की मंशा को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है।

निषाद पार्टी के जिलाध्यक्ष अनिकेत निषाद ने पहले ही सहायक मत्स्य निदेशक, सोनभद्र को पत्र लिखकर मांग की थी कि नाव वितरण पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और लाभार्थी की मौजूदगी में किया जाए तथा नई नाव मौके पर उपलब्ध कराकर ही वितरण मान्य किया जाए। बावजूद इसके, विभाग द्वारा जिन तीन लाभार्थियों को नाव वितरण दर्शाया गया, जमीनी हकीकत कुछ और ही निकली।
🔎 मौके पर खुली पोल
स्थलीय निरीक्षण में सामने आया कि
- अधूरी नावों को जल्दबाजी में तैयार दिखाया गया
- पुरानी और इस्तेमाल की हुई नावों पर केवल डेंटिंग-पेंटिंग कर नई नाव बताया गया
- कागजी औपचारिकताएं पूरी कर सरकारी रिकॉर्ड में वितरण दर्शा दिया गया
यह पूरा मामला सरकारी धन के दुरुपयोग और सुनियोजित फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है। योजना, जो निषाद समाज की आजीविका का सहारा बनने वाली थी, उसे कुछ जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों ने कमाई का जरिया बना लिया।
😡 निषाद समाज में भारी रोष
इस कथित घोटाले को लेकर निषाद समाज में जबरदस्त आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई, तो मत्स्य विभाग भविष्य में बड़े घोटालों का केंद्र बन जाएगा और वास्तविक लाभार्थी हमेशा की तरह ठगे जाते रहेंगे।
🚨 उठी उच्चस्तरीय जांच की मांग
अब सवाल यह है कि
- क्या शासन इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराएगा?
- क्या दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई होगी?
- या फिर निषाद समाज के हक पर ऐसे ही डाका पड़ता रहेगा?
निषाद समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह आंदोलन का रास्ता अपनाने से भी पीछे नहीं हटेगा।
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