अब राज्यसभा में दिखेगा ‘चाणक्य’ का अंदाज
समाज जागरण पटना जिला संवाददाता:- वेद प्रकाश
पटना/ बिहार की राजनीति में रविवार को एक बड़े अध्याय का अंत और नए सफर का आगाज हुआ। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद की सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद संवैधानिक बाध्यताओं के चलते उन्होंने यह कदम उठाया है।संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी और विधान परिषद सदस्य संजय गांधी के माध्यम से मुख्यमंत्री का इस्तीफा सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंपा गया।
नियमों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं रह सकता। 16 मार्च को राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद नीतीश कुमार के पास 14 दिनों का समय था, जिसके भीतर उन्होंने उच्च सदन (विधान परिषद) छोड़ने का निर्णय लिया। इस्तीफे के साथ ही मुख्यमंत्री आवास ‘1 अणे मार्ग’ पर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर रही। सुबह से ही जेडीयू के कद्दावर नेता ललन सिंह, संजय झा, विजेंद्र यादव और विजय चौधरी की मौजूदगी ने भविष्य के नए समीकरणों की ओर इशारा किया है।
हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने स्पष्ट किया है कि नीतीश कुमार संवैधानिक तौर पर अगले छह महीनों तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं। इस सियासी फेरबदल के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी अपनी पारंपरिक सीट बांकीपुर से विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए अपनी मां को याद किया और जीवन के इस नए मोड़ को सेवा का अगला पड़ाव बताया।
नीतीश कुमार का दिल्ली कूच करना बिहार की राजनीति में एक बड़े शून्य या फिर एक नई रणनीति का संकेत माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल विस्तार या सत्ता संरचना में कुछ और चौकाने वाले बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल, सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्यसभा जाने के बाद नीतीश कुमार की बिहार सरकार में क्या भूमिका रहती है।
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