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एसटी सूची में कुर्मी/कुड़मी समुदाय को शामिल करने का विरोध तेज, आदिवासी समाज ने छेड़ा आंदोलन

अभय कुमार मिश्रा, दैनिक समाज जागरण, ब्यूरो चीफ, कोल्हान झारखंड

सरायकेला-खरसावां (झारखंड) 23 सितंबर 2025: आदिवासी समाज की अस्मिता, संस्कृति और अधिकार पर हो रहे हमलों के खिलाफ सरायकेला-खरसावां में आवाज बुलंद हो रही है। कुर्मी/कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल करने की साज़िश का विरोध करते हुए आदिवासी युवा समन्वय समिति ने जागरूकता अभियान की शुरुआत कर दी है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यह कदम आदिवासी अस्तित्व पर सीधा प्रहार है और इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

गांव-गांव में आदिवासी युवा जागरूकता फैलाने में जुट गए हैं। हर जगह से यही आवाज़ उठ रही है – “हमारी पहचान पर चोट नहीं चलेगी, हमारी अस्मिता से खिलवाड़ नहीं चलेगा!”

इस अभियान में मुंडासाई के मुकेश कुमार मुंडा, मानकी मुंडा, गोमेया के सेलाय, बिरू के सोनातन, रीडिंगदाह के राऊतु हाईबुरू, गोमेया हेम्ब्रम, जोटोडीह के सोहन लाल सरदार, पतपत के विकास सरदार, रायजामा के सोयना सरदार और उपेंद्र सरदार, बिरूजारा के बिरसा महाली (उपाध्यक्ष), श्याम चरण महाली, मुंडासाई के लिटा हेम्ब्रम, पाना हेम्ब्रम, दमदार हेम्ब्रम, बुरगीपुट के राजकिशोर हांसदा, रामदास हांसदा सहित कई आदिवासी नेता और कार्यकर्ता संघर्ष की अगुवाई कर रहे हैं।

नेताओं ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ आज की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की पहचान और अस्मिता बचाने की लड़ाई है। आंदोलन को लेकर बड़ी रणनीति बनाई जा रही है और आने वाले दिनों में इसे और तेज किया जाएगा।


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