मामला दादा भाई लवकेश सिंह स्मृति सिविल अस्पताल ब्यौहारी का
ब्यौहारी – स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल में इलाज कराने आए लोगों को बेहतर सुविधा मिले, इसको लेकर कई योजना बनाई है, लेकिन गवर्नमेंट अस्पताल में मरीजों के बेड से चादर गायब है। मरीजों के बेड की चादर प्रत्येक दिन धुल कर बिछाने की व्यवस्था की है, लेकिन सिस्टम की कुव्यवस्था के कारण इस योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। यहां इलाज कराने आए मरीजों को अपने घर से ही चादर व तकिया लाना पड़ता है। अगर वे किसी कारणवश अपना चादर-तकिया नहीं लाते है, तो उन्हें बेड पर ऐसे रहकर इलाज कराना पड़ता है। चिकित्सक व कर्मी भी अस्पताल प्रबंधक द्वारा संसाधनों की व्यवस्था नहीं कराने की बात कह व्यवस्था सुधारने में हाथ खड़ा कर दिया हैं। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। इतना ही बिना चादर के बेड पर रहने से मरीजों के संक्रमित होने की संभावनाएं बनी रहती है।
धुलाई के नाम पर मोटी राशि
भले ही इलाज कराने आए मरीजों के बेड पर चादर नहीं बिछाई जाती हो, लेकिन प्रतिमाह चादर धुलाई के नाम भारी-भरखम राशि खर्च की जाती है। अब सवाल उठता है कि जब मरीजों के बेड पर चादर ही नहीं बिछाई जाती है, तो चादर धुलाई के नाम पर मोटी रकम कैसे अस्पताल प्रशासन धुलाई के नाम पर ठेकेदार को भुगतान कर देता है। अगर भुगतान कर रहा है, तो यह एक तरह से आपसी बंदरबांट में भी कही हिस्सेदारी तो नही है।
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