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पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी शून्य, डीजल और हवाई ईंधन पर बढ़ाई गई ड्यूटी; केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

नई दिल्ली। दिवाली से पहले केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क में बड़ा बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय ने 31 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना के जरिए पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) को शून्य कर दिया है। वहीं, डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर शुल्क बढ़ा दिया गया है। नई दरें 31 अक्टूबर से अगले पखवाड़े के लिए प्रभावी हो गई हैं।

हालांकि, इस फैसले को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि पेट्रोल पर टैक्स शून्य होने का मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल सस्ता हो जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर कितना बदला शुल्क?

सरकार की नई अधिसूचना के अनुसार निर्यात शुल्क में निम्नलिखित बदलाव किए गए हैं:

पेट्रोलियम उत्पादपुराना शुल्कनया शुल्क
पेट्रोल निर्यात₹2.50 प्रति लीटरशून्य
डीजल निर्यात₹8.50 प्रति लीटर₹11.50 प्रति लीटर
एटीएफ (विमान ईंधन) निर्यात₹10.50 प्रति लीटर₹11 प्रति लीटर

इस तरह डीजल के निर्यात शुल्क में 3 रुपये प्रति लीटर और विमान ईंधन के शुल्क में 50 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। वहीं पेट्रोल के निर्यात पर पहले लगने वाला 2.50 रुपये प्रति लीटर का शुल्क समाप्त कर दिया गया है। Moneycontrol+2

आम लोगों को पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या होगा असर?

सरकार के इस फैसले का सीधा असर पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर नहीं पड़ेगा। यह बदलाव केवल निर्यात किए जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू है। घरेलू बाजार में बिक्री के लिए पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा उत्पाद शुल्क में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।

इसलिए वाहन चालकों को इस फैसले के आधार पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल कटौती की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। The Financial Express+1

क्यों लिया गया यह फैसला?

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए निर्यात शुल्क की समय-समय पर समीक्षा कर रही है।

सरकार ने 27 मार्च 2026 से पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्यात शुल्क लगाने की व्यवस्था शुरू की थी। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए हर पखवाड़े शुल्क की समीक्षा की जाती रही है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अंतर से होने वाले असाधारण लाभ पर नियंत्रण रखना है। PTIFeed+1

फिलहाल सरकार का यह फैसला पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात कारोबार से जुड़ा है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों में किसी राहत की घोषणा नहीं हुई है।


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