विद्यालय के समय पर संचालित हो रही कोचिंग, मूकदर्शक बनी बिभाग
समाज जागरण पटना जिला संवाददाता:- वेद प्रकाश
पटना/ जिले के बिभिन्न इलाको में विद्यालय की अवधि में कोचिंग व ट्यूशन संचालित होने से बच्चों की भविष्य पर गहरा प्रभाव पड़ रही है। मात्र दो घण्टे के लिए बच्चों व छात्रों का छह घण्टे बर्वाद हो रहा है। वही इसपर रोकथाम करने के बजाए शिक्षा बिभाग मुक़दर्शन बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार विद्यालय में शिक्षण कार्य की अवधि सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक निर्धारित है। लगभग सभी विद्यालयों में योग्य शिक्षक मौजूद है। लेकिन देखा जाए तो किसी भी विद्यालय में छात्रों की उपस्थिति कम पाई जाती है। यहां तक कि कई विद्यालयों में सरकारी लाभ लेने के लिए छात्रों तथा उनके अविभावकों की ओर से शिक्षकों पर दबाव बनाई जाती है। दबाव के कारण शिक्षक मजबूर होकर हाजरी बना देते है। जिससे छात्रों के बीच अनुपस्थिति की भय नही रह जाती। बच्चों तथा छात्रों को विद्यालयों में अनुपस्थित रहने का मुख्य कारण विद्यालय के समय पर निजी कोचिंग व ट्यूशन संस्थाओं का संचालन है। जानकारी लेने पर शिक्षक कहते है कि छात्र विद्यालय नही आते तो किसे पढाऊँ। जबकि छात्र व अविभावक कहते है कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई लिखाई नही होती है। विचारणीय बात यह है कि आखिर शिक्षक विद्यालय आते किस लिए है? जब एक प्रशिक्षित तथा डिग्री प्राप्त दर्जनों शिक्षक विद्यालयों में छह घण्टे पढ़ाकर भी छात्रों को ज्ञान नही दे सकते तो निजी कोचिंग तथा ट्यूशन में अप्रशिक्षित शिक्षक मात्र एक दो घण्टे में कितना ज्ञान दे सकते है? इन बातों पर अविभावकों को विचार करने की जरूरत है। वही विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से छात्रवृति, पोशाक से लेकर साइकिल के लिए भी राशि दी जा रही है। प्राथमिक विद्यालयों में मध्याह्न भोजन तक दी जा रही है। अब तो डिजिटल हाजिरी बनाने के लिए घोषणा हो चुकी है। वही अधिकांश विद्यालयों में अभी बच्चों की डिजिटल हाजिरी की शुरुआत नही हुई है। इतना के बावजूद भी यदि सुधार नही होती तो स्थानीय स्तर पर अधिकारियों को सख्या रवैया अपनाना चाहिए।



